सिविल सर्जन ने किया दस्त रोको अभियान का शुभारम्भ

करनाल, 16 जून:  सिविल सर्जन डॉक्टर पूनम चौधरी ने  जिला नागरिक अस्पताल एन.आर.सी. में मंगलवार को दस्त रोको अभियान का शुभारम्भ किया। इस मौके पर सिविल सर्जन ने बताया कि बाल मृत्यु दर को कम करना राष्ट्रीय और राज्य दोनों सरकारों के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता है। भारत में बाल दस्त एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है, जो पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में लगभग 4.8 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेवार है।
 इनमे से अधिकांश मौतें प्रारंभिक पहचान और डिहाइड्रेशन के समय पर प्रबंधन के माध्यम से रोकी जा सकती है। दस्त के दौरान ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन ओ.आर.एस, जिंक सप्लीमेंटेशन और निरंतर पर्याप्त पोषण का उपयोग मृत्यु दर को काफी कम कर सकता है और बाल स्वास्थ्य परिणामों में सुधार कर सकता है। इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए, भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपने राष्ट्रव्यापी प्रयास को दस्त रोको अभियान के रूप में पुन: ब्रांड किया है जोकि 16 जून से 31 जुलाई 2026 तक मनाया जाएगा। इस अभियान का नारा डायरिया ‘की रोकथाम, सफाई और ओ.आर.एस. से रखें अपना ध्यान’ है।
उन्होंने बताया कि डायरिया से होने वाली मौतें आमतौर पर गर्मियों और मानसून के महीनों में होती हैं और सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब सामाजिक-आर्थिक स्थिति वाले बच्चे होते हैं। दस्त को प्रतिदिन तीन या अधिक बार ढीले या तरल मल के निकलने या व्यक्ति के लिए सामान्य से अधिक बार मल का निकलना के रूप में परिभाषित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत मौसमी दस्त की वृद्धि के साथ संरेखित होगा और प्रमुख हस्तक्षेपों में विशेष स्तनपान को बढावा देना, रोटावायरस टीकाकरण, हाथ की स्वच्छता, सुरक्षित पानी का प्रावधान, ओ.आर.एस. और जिंक का वितरण, सभी स्वास्थ्य सुविधओं और आंगनवाड़ियों में ओ.आर.एस.-जिंक कॉर्नर की स्थापना शामिल है। उन्होंने बताया कि दस्त से बचाव के लिए हाथों को साबुन और पानी से अच्छे से धोंए, यह सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे के आसपास हमेशा सफाई हो, साफ  पीने के पानी का उपयोग करें, हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें, बच्चों को पहले 6 महीने तक केवल स्तनपान करवाये व 6 महीने के बाद उचित मात्रा में एवं पोषक खाद्य पदार्थ दें। इसके साथ ही बच्चों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाने वाली रोटावायरस की वैक्सीन और खसरे से बचाव के लिए टीकाकरण अवश्य करवाये व साथ ही समय पर विटामिन ए की खुराक भी दें जिसके बारे में जानकारी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, ए.एन.एम. या आशा कार्यकर्ता से भी ले सकते हैं। इस बारे में यह भी जानना जरूरी है कि शौचालय जाने के बाद, खाना पकाने से पहले, खाना खाने से पहले, कूड़ा या जानवरों को छूने के बाद, बच्चों का मल साफ  करने के बाद, बच्चों को खाना खिलाने से पहले आदि परिस्थितियों में हाथों को साबुन से अवश्य धोयें।
सिविल सर्जन डॉक्टर पूनम चौधरी ने बताया कि डायरिया की वजह से होने वाले निम्नलिखित खतरे के लक्षणों के होने पर डॉक्टर से तुरन्त सम्पर्क करें जिसमें बच्चों का स्तनपान न करना, सब कुछ उल्टी कर देना, बार-बार पतले मल के कारण गंभीर निर्जलीकरण, बच्चों का अधिक बीमार होना, मल में खून आना, बच्चों का सुस्त होना या बेहोश हो जाना, बच्चों को बुखार होना, तेजी से संास लेना और संास लेने में कठिनाई होना, हथ्रेलियां और तलवे पीले होना, बच्चों को दौरे पडना इत्यादि शामिल है ऐसी परिस्थितियों में बच्चों को तुरन्त नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में ले जाकर के चिकित्सक से परामर्श लें। डायरिया को डिहाईड्रेशन में न बदलने दे और ओ.आर.एस. और जिंक का उपयोंग तुरन्त शुरू करें।
उप-सिविल सर्जन प्रतिरक्षण व बाल स्वास्थ्य डाक्टर शशी गर्ग ने बताया कि इस कार्यक्रम के अन्र्तगत घरों में ओ.आर.एस. पैकेट और जिंक-14 गोलियों का वितरण और ओ.आर.एस की तैयारी का प्रदर्शन घर-घर जाकर आशा/उषा परामर्श उपकरण के रूप में एम.सी.पी. कार्ड का उपयोग करते हुए माताओं/परिवारो को महत्वपूर्ण संदेश देंगी। प्रत्येक आशा/उषा को पांच वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को पूर्व-स्थिति के रूप में 2 ओ.आर.एस. पैकेट और 14 जिंक की गोलियां वितरित करेंगी।