चित्रा सरवारा ने फ्रीहोल्ड मुद्दे को लेकर मंत्री विपुल गोयल से की मुलाकात

अंबाला, 2 सितंबर:- चित्रा सरवारा ने फ्री-होल्ड मुद्दे को लेकर शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल से मुलाकात की और उनके सामने अंबाला छावनी की मुख्य मांगें रखीं। उसने कैंट के आबकारी क्षेत्र को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के फ्री-होल्ड बनाने की मांग की और प्रस्तावित भारी फीस पर एतराज जताया। उसने मांग की कि रजिस्ट्री, नक्शे, मालिकी तबादले और बैंक कर्जों की रुकावटों को दूर करके नागरिकों को पूर्ण और स्पष्ट मालिकी अधिकार दिए जाएं।
हरियाणा की युवा नेता और टीम चित्रा की संस्थापक चित्रा सरवारा ने अपने साथियों, पार्षदों, पूर्व पार्षदों और अंबाला सदर के विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों के साथ अंबाला छावनी के आबकारी क्षेत्र को फ्री-होल्ड बनाने की मांग को लेकर शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छावनी के हजारों परिवारों से संबंधित जायदाद अधिकारों के महत्वपूर्ण मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मंत्री को कहा कि अंबाला छावनी आबकारी क्षेत्र में दशकों से रह रहे मौजूदा जमीन और मकान मालिकों को पूरे और स्पष्ट मालिकी अधिकार दिए जाएं और फ्री-होल्ड प्रक्रिया ऐसी हो जो नागरिकों पर भारी वित्तीय बोझ न डाले। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं है बल्कि हजारों परिवारों के घरों, कारोबारों, जीवन की बचत और भविष्य से संबंधित अधिकारों का सवाल है।
चित्रा सरवारा ने कहा कि अंबाला छावनी आबकारी क्षेत्र में हजारों परिवार पीढ़ियों से मौजूदा ग्रांटों के तहत प्राप्त की गई जायदादों में रह रहे हैं। यह जायदादें नागरिकों और उनके पुरखों द्वारा उस समय की कानूनी प्रक्रियाओं और प्रचलित नियमों के अनुसार प्राप्त की गई थीं। दशकों से, टैक्स, हाउस टैक्स, स्टांप ड्यूटी और इन जायदादों से संबंधित अन्य बकाए नियमित तौर पर सरकार को अदा किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद, इन परिवारों को अभी तक अपनी जायदादों पर पूरे और स्पष्ट मालिकी अधिकार नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा, "जब कोई परिवार दशकों से अपनी जायदाद से संबंधित टैक्स और अन्य सरकारी फीसों का नियमित तौर पर भुगतान करता आ रहा है तो उसे उस जायदाद की पूरी मालिकी प्राप्त करने के लिए दोबारा भारी वित्तीय बोझ झेलने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। चित्रा सरवारा ने पिछली भाजपा सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अंबाला से तत्कालीन विधायक अनिल विज उस सरकार में स्थानीय निकाय मंत्री और गृह मंत्री दोनों थे। उनके पास 2019 से 2024 तक इस मुद्दे को हल करने के लिए पद, प्रभाव और काफी मौके थे पर फ्री-होल्ड के मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी गई। उन्होंने कहा, "अंबाला ने जिस भरोसे और शक्ति के साथ अनिल विज को सत्ता में लाया था उसका उपयोग अंबाला छावनी के इस लंबे समय से लटके रहे मुद्दे को हल करने के लिए नहीं किया गया। यह बेहतर मौका 2019 से 2024 तक बर्बाद हो गया।" उन्होंने कहा कि सरकार को अब इस मुद्दे को बैठकों और भरोसा देने तक सीमित रखने की बजाय एक स्पष्ट फैसले के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
चित्रा सरवारा ने प्रस्तावित ड्राफ्ट नीति के बारे में भी गंभीर चिंताएं जाहिर कीं। उनके अनुसार, फ्रीहोल्ड के लिए कलेक्टर रेट के आधार पर भारी फीस लगाने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। अगर फीस लगभग 60,000 से 72,000 रुपए प्रति वर्ग गज के कलेक्टर रेट पर निर्धारित की जाती है तो यह हजारों परिवारों पर एक महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ डाल सकती है। दशकों से सरकार को टैक्स और अन्य फीसें अदा करने वाले परिवारों से पूरे मालिकी अधिकार प्राप्त करने के लिए काफी रकम वसूलना जनहित के बारे में गंभीर सवाल खड़े करता है। 
उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित भारी फीस को खत्म किया जाए और फ्री-होल्ड प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी, व्यावहारिक और जनता-अनुकूल बनाया जाए। उन्होंने मांग की कि सभी रुकावटों को फ्री-होल्ड के साथ स्थायी तौर पर हल किया जाए। फ्री-होल्ड का लाभ सिर्फ सरकारी दस्तावेजों तक सीमित न रहे बल्कि नागरिक अपनी जायदाद का असल आर्थिक मूल्य प्राप्त कर सकें।