बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है रावण दहन: अशोक मेहता

हरियाणा/हिसार: रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।  रावण दहन इस बात का प्रतीक है कि कितनी भी शक्तिशाली बुराई क्यों न हो, अंततः सच्चाई और धर्म की ही जीत होती है।
यह बात पूर्व राज्य सूचना आयुक्त अशोक मेहता ने कही। वे गांव पंजलासा में लगातार 29वें साल दशहरे के अवसर पर पहुंचे थे। उनके साथ कांग्रेस सचिव अंकुर मेहता और आर्यवीर भी पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि भगवान राम की रावण पर विजय का दिन है दशहरा।  दशहरे के दिन भगवान राम ने रावण पर विजय पाई थी, इसलिए इस दिन रावण का पुतला जलाया जाता है। रावण दहन अहंकार और अत्याचार का नाश: जो दर्शाता है। रावण दहन अहंकार, अन्याय और अत्याचार के अंत का भी प्रतीक है, जो दर्शाता है कि इन बुराइयों का नाश निश्चित है। 
रावण दहन केवल एक पुतले का दहन नहीं अपितु मानव की भीतर की बुराइयों के प्रतीक भी है। रावण के दस सिरों को काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, अन्याय और ईर्ष्या जैसी दस बुराइयों का प्रतीक माना जाता है, जिन्हें जलाकर हम खुद को इन बुराइयों से दूर करने का संकल्प लेते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान राम ने हमेशा सत्य का रास्ता अपनाया वहीं रावण का रास्ता बुराई का था। उन्होंने समस्त उपस्थित लोगों को दशहरे पर्व की बधाई दी। 
इस दौरान प्रधान संजय बक्शी, कैशियर कुलदीप बक्शी, चेयरमेन चंद्र प्रकाश केसर, सचिव शिव हरि बाली, उप प्रधान विनय बक्शी, सिक्योरिटी इंचार्ज बीटटू चाचा, सरपंच (एडवाइजर) संजीव, संरक्षक चमन लाल, मेम्बर चिराग सूदन, मिक्की बख्शी, अजब रन्याल, मुकेश धीमान, राहुल कश्यप, मास्टर ओम प्रकाश पाल, बरखा राम धीमान, बिल्लू ग्रेवाल आदि मौजूद रहे।