चंडीगढ़, 13 अक्तूबर:- हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि किसानों को धान की पराली जलाने से रोकने के लिए गांव स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और सभी जिलों में “पराली सुरक्षा बल” का भी गठन किया गया है।
हरियाणा सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने भी सराहना की है।
श्री राणा ने यह जानकारी आज केंद्र सरकार द्वारा आयोजित “फसल अवशेष जलाने के प्रबंधन के मुद्दे पर मंत्री-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक” में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चंडीगढ़ से हरियाणा का पक्ष रखते हुए दी। इस अवसर पर विभाग के निदेशक श्री अमित खत्री और अतिरिक्त निदेशक श्री प्रदीप मील भी उपस्थित थे।
दिल्ली में आयोजित इस बैठक में उपरोक्त दोनों केंद्रीय मंत्रियों के अलावा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के कृषि मंत्री भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने राज्यों से जुड़े हुए थे।
श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों और वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से लगातार सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कुल 66,050 आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा, राज्य के 37 लाख एकड़ धान क्षेत्र के प्रबंधन के लिए कुल 440 करोड़ रुपये की अनुमानित प्रोत्साहन राशि निर्धारित की गई है, जिसके तहत किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
उन्होंने आगे बताया कि पर्यावरण संरक्षण और पानी की बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धान की सीधी बुवाई (DSR) अपनाने वाले किसानों को 4,500 रुपये प्रति एकड़ और धान की फसल के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलें उगाने यानी फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को 8,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये प्रति एकड़ तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
खेतों में निगरानी की सख्त व्यवस्था के संबंध में जानकारी देते हुए श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि खेतों की निगरानी के लिए अब तक 20 ड्रोन तैनात किए जा चुके हैं और जल्द ही 30 अतिरिक्त ड्रोन भी तैनात किए जाएंगे। राज्य में सख्त नियमों और जागरूकता अभियानों के कारण अब तक फसल अवशेष जलाने (AFL) की केवल सात घटनाएं ही सामने आई हैं। इनमें से हांसी जिले में दर्ज एक घटना दुर्घटनावश हुई थी, जिसके संबंध में नियमों के अनुसार 5,000 रुपये का चालान जारी किया गया। बाकी घटनाएं गैर-कृषि क्षेत्रों में हुई थीं।
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने आगे बताया कि तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करते हुए पूरे राज्य में 79 “पीएम 2.5” सेंसर स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही, जमीनी स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए गांव स्तर पर कुल 8,535 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और सभी जिलों में विशेष “पराली सुरक्षा बल” का गठन किया गया है।
उन्होंने केंद्र सरकार से यह मांग भी की कि पराली प्रबंधन के तहत हरियाणा सरकार द्वारा किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की दर से दी जा रही प्रोत्साहन राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करे। इससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ा जा सकेगा।
कृषि मंत्री ने प्रदेश के सभी किसान भाइयों से अपील की कि वे पराली में आग लगाने के बजाय सरकारी योजनाओं, प्रोत्साहन राशि और कृषि उपकरणों का अधिक से अधिक लाभ उठाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने तथा जमीन की उपजाऊ शक्ति को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।
