चंडीगढ़:- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ जालंधर में मामला दर्ज किया है। यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े व्यक्तियों पर भ्रष्टाचार और प्रभाव का दुरुपयोग करने के आरोपों के संबंध में दर्ज किया गया है।

यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को उसके द्वारा दर्ज मामले में कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं करने के निर्देश देने के एक दिन बाद सामने आया है। हालांकि, अदालत ने एफआईआर पर रोक लगाने या जांच रोकने से इनकार कर दिया था। अदालत ने पंजाब सरकार को जांच में सहयोग करने के निर्देश भी दिए थे।

आम आदमी पार्टी (आप) की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि घुम्मन के खिलाफ मामला दर्ज करने में ईडी द्वारा दिखाई गई जल्दबाजी हैरान करने वाली है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 21 जनवरी, 2027 को होने वाली अगली सुनवाई तक कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं करने को कहा है।

यह मामला ईडी द्वारा पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को भेजे गए पत्रों से जुड़ा है। इन पत्रों में सरकारी तबादलों और तैनातियों, निविदा प्रक्रियाओं, प्रशासनिक मंजूरियों, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच तथा अन्य आधिकारिक फैसलों में कथित अनियमितताओं को उजागर किया गया था। आरोप सरकारी रियायतें देने के बदले वित्तीय या अन्य लाभों के कथित लेन-देन से संबंधित हैं।

ईडी के पत्रों के आधार पर पंजाब पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने के बाद अधिवक्ता निखिल सराफ ने स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया। 5 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज करने और आरोपों की जांच करने के निर्देश दिए। एजेंसी को दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने तथा राज्य सरकार और पंजाब पुलिस को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया था।

इसके बाद सीबीआई ने घुम्मन और पांच अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की तथा चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय समेत कई स्थानों पर छापेमारी की। सीबीआई ने घुम्मन को तीन बार समन भेजा, लेकिन वह जांच में शामिल नहीं हुए। पंजाब सरकार ने भी सीबीआई जांच के निर्देश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।