ऊना, 30 अक्टूबर:- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ऊना द्वारा संचालित सुरक्षित बचपन अभियान-2026 के अंतर्गत ऊना जिला के 13 सरकारी एवं निजी विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, बाल संरक्षण, कानूनी सुरक्षा उपायों तथा सुरक्षित बचपन के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा।

अभियान के तहत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ऊना नेहा शर्मा द्वारा डीएवी सेंटेनरी स्कूल ऊना में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (IV), ऊना उर्वशी द्वारा आदर्श पब्लिक स्कूल, पंडोगा, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (II), अम्ब तान्या द्वारा मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल ऑफ साइंस, अम्ब तथा न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (III), अम्ब सोना द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कलरूही में कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इसी क्रम में पैनल अधिवक्ता केशव कुमार चंदेल द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, तेऊरी, रेनू शर्मा द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, अजौली तथा ज्योति किरण द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, समूर कलां में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इसके अतिरिक्त उपमुख्य विधिक सहायता बचाव अधिवक्ता परवीन द्वारा संस्कार भलेती स्कूल, बंगाणा, सहायक विधिक सहायता बचाव अधिवक्ता विकास लोहिया द्वारा डीएवी पब्लिक स्कूल, लठियाणी तथा सहायक विधिक सहायता बचाव अधिवक्ता परवीन कुमारी द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, नंगल कलां में कार्यक्रम आयोजित किए गए।

वहीं, पैनल अधिवक्ता नेहा पुरी द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कोटला कलां, शिखा द्वारा एसबीएस मेमो पब्लिक स्कूल, सोहारी तथा राकेश कुमार द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, भद्रकाली में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इन कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बाल संरक्षण, बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम, उनके कानूनी अधिकारों तथा किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी गई। इन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से कुल 2,407 प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ऊना की सचिव शिखा लखनपाल ने बताया कि सुरक्षित बचपन अभियान के माध्यम से जिला के विभिन्न विद्यालयों में निरंतर जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, ताकि बच्चों को उनके अधिकारों एवं कानूनी संरक्षण के प्रति जागरूक कर एक सुरक्षित, संरक्षित एवं सशक्त बचपन सुनिश्चित किया जा सके।