चंडीगढ़, 23 अक्टूबर:- हरियाणा सरकार ने राज्य में भूजल संसाधनों के संरक्षण, नियमन और बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, नियमन एवं प्रबंधन) प्राधिकरण (एचडब्ल्यूआरए) ने जनहित में एक बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण ने औद्योगिक, बुनियादी ढांचा और खनन परियोजनाओं के लिए भूजल निकासी के नियमितीकरण को आसान बनाने के उद्देश्य से 30 नवंबर 2026 तक विलंब शुल्क में विशेष छूट देने का निर्णय लिया है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण अधिनियम, 2020 के तहत गठित यह प्राधिकरण राज्य में भूजल और सतही जल के उपयोग की निगरानी तथा नियमन का कार्य कर रहा है। नियमों के अनुसार, राज्य में किसी भी औद्योगिक, बुनियादी ढांचा या खनन परियोजना के लिए भूजल का उपयोग करने से पहले प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्राप्त करना अनिवार्य है। विभिन्न हितधारकों और उद्योगपतियों की सुविधा तथा उन्हें नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विलंब शुल्क में राहत की यह समय-सीमा निर्धारित की गई है।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि 30 नवंबर 2026 तक मिलने वाली इस छूट के बाद 1 दिसंबर 2026 से प्राधिकरण के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार ही विलंब शुल्क लिया जाएगा। छूट की श्रेणी में आने वाले उपयोगकर्ताओं को छोड़कर अन्य सभी भूजल उपयोगकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे प्राधिकरण के आधिकारिक पोर्टल https://hwra.org.in के माध्यम से अपने आवेदन जमा करवाएं और आवश्यक एनओसी प्राप्त करें। निर्धारित समय-सीमा के भीतर एनओसी नहीं लेने या नियमों का उल्लंघन करने वाले परियोजना प्रस्तावकों के खिलाफ लागू नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
