चंडीगढ़, 5 मार्च, 2025- पंजाब विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग ने प्रो. कुलदीप सिंह की मौलिक पुस्तक "दक्षिण एशिया में पंजाब नदी जल विवाद" पर एक विचारोत्तेजक पुस्तक चर्चा आयोजित की, जिसे रूटलेज पब्लिशर्स (2024) द्वारा प्रकाशित किया गया है। सिंह का कार्य विवाद के इतिहास, राजनीति और क्षेत्र पर प्रभाव की जांच करता है, भारत के विभाजन के बाद से इसकी जटिलताओं और निहितार्थों की खोज करता है।
प्रो. अंजू सूरी ने अतिथियों और दर्शकों का स्वागत किया, इसके बाद प्रो. प्रियतोष शर्मा, डॉ. जसबीर सिंह और डॉ. आशीष कुमार ने अतिथियों का पुष्पांजलि से स्वागत किया। इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. जसबीर सिंह ने अतिथियों और दर्शकों का औपचारिक रूप से स्वागत किया। प्रो. अंजू सूरी ने विभाग की रूपरेखा प्रस्तुत की।
तीन पैनलिस्टों ने पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, जिनमें ऐतिहासिक, राजनीतिक, तकनीकी, रणनीतिक, सांस्कृतिक आदि शामिल थे। पुस्तक के लेखक, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुलदीप सिंह ने पुस्तक के निर्माण की यात्रा का वर्णन करने से पहले विभाग और पैनलिस्टों को धन्यवाद दिया। उन्होंने अतीत और विवादों की शुरुआत के बारे में बताया और सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के तटवर्ती और बेसिन क्षेत्रों में अंतर किया। गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुखदेव सिंह सोहल ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, मूल, प्रकृति और विषय से संबंधित चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने औपनिवेशिक राज्य और राष्ट्र राज्य के दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला। पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रोनकी राम ने विभिन्न अनचर्चित मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए अपनी टिप्पणी दी, जिन पर चर्चा की जानी चाहिए। गुरु रामदास स्कूल ऑफ प्लानिंग के पूर्व प्रोफेसर प्रो. हरजिंदर सिंह ने पुस्तक को संदर्भ पुस्तक के रूप में सुझाया और एराडी आयोग और उसके प्रभाव के बारे में बात की।
कार्यक्रम के बाद ज्ञान साझा करने वाला प्रश्न-उत्तर सत्र हुआ। गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के प्रो. रंजीत सिंह घुमन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और अपने ज्ञानवर्धक भाषण दिए। इतिहास विभाग के डॉ. आशीष कुमार ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया। इस सत्र में विभिन्न विभागों के विभिन्न और शोध विद्वानों ने भाग लिया। प्रो. सुखमणि बाल रियार, प्रो. सतविंदर कौर, डॉ. रविंदर, डॉ. हरजिंदर सिंह दिलगीर, इंजी. तरजिंदर सिंह, जितेंद्र मोहर (फिल्म निर्माता) आदि भी वहां मौजूद थे।
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