चंडीगढ़, 30 अक्टूबर:- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी योजना की शुरुआत की, जिसने देश के किसान और सरकार के बीच रिश्ते को नई परिभाषा दी। यह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना थी, जिसके तहत पहली बार देशभर में किसानों के खातों में सीधे सम्मान राशि पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की गई।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को भिवानी में प्रदेश के किसानों को 24वीं किस्त जारी करने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, सांसद श्री धर्मबीर सिंह, भिवानी के विधायक श्री घनश्याम सर्राफ, बवानीखेड़ा के विधायक श्री कपूर वाल्मीकि, बाढड़ा के विधायक श्री उमेद पातुवास, महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती मीना परमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और पदाधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के 86 प्रतिशत से अधिक किसान छोटे और सीमांत किसान हैं। छोटे किसानों को बुवाई के समय बीज, खाद और जुताई के लिए पैसों की जरूरत होती थी। मजबूरी में उन्हें ऊंचे ब्याज पर साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था और फसल आने से पहले ही उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता था।
प्रधानमंत्री जी ने किसानों की इस पीड़ा को समझा और संकल्प लिया कि खेती के जरूरी खर्चों के लिए किसान को किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। इसकी शुरुआत छोटे और सीमांत किसानों से हुई और कुछ ही महीनों में यह योजना देश के सभी भूमिधारक किसान परिवारों तक पहुंच गई। प्रधानमंत्री की सोच थी कि किसान खुशहाल और मजबूत बनें तथा उनकी आमदनी बढ़े। किसान सम्मान निधि ने किसानों को मजबूत करने का काम किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यह दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजनाओं में से एक है। छोटी-छोटी किस्तों से शुरू हुई यह धारा आज 4 लाख 47 हजार करोड़ रुपये से अधिक का समुद्र बन चुकी है। जब कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की रफ्तार रोक दी थी, उस समय भी इस योजना के माध्यम से 1 लाख 71 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों तक पहुंची और इस राशि ने गांवों की अर्थव्यवस्था के पहियों को रुकने नहीं दिया।
प्रधानमंत्री ने गुजरात के बनासकांठा से 24वीं किस्त जारी की, 9 करोड़ 34 लाख से अधिक किसान बने लाभार्थी
योजना की हर चौथी महिला लाभार्थी किसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस योजना की लगभग हर चौथी लाभार्थी महिला किसान है, जिनके खातों में 1 लाख 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंची है। यह सब बिना किसी बिचौलिए, बिना कमीशन और बिना किसी सिफारिश के हुआ है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ने गुजरात के बनासकांठा से 24वीं किस्त जारी की।
एक बटन दबाते ही देश के 9 करोड़ 34 लाख से अधिक किसान परिवारों के खातों में 18 हजार 680 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंची है और इसके साथ ही योजना की कुल राशि 4 लाख 65 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
केंद्र सरकार ने 2030-31 तक इस योजना के लिए 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी दी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के 16 लाख 23 हजार किसान परिवार भी इस योजना के भागीदार हैं, जिनके खातों में 324 करोड़ 75 लाख रुपये पहुंचे हैं। इनमें भिवानी के 1 लाख 21 हजार किसान परिवारों को 24 करोड़ 20 लाख रुपये मिले हैं। 24 किस्तों में अब तक हरियाणा के किसानों तक 8 हजार 206 करोड़ 36 लाख रुपये पहुंच चुके हैं और आने वाले वर्षों के लिए भी यह भरोसा पक्का किया गया है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2030-31 तक इस योजना के लिए 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह किसानों को मोदी जी की दी गई गारंटी है।
उन्होंने कहा कि भिवानी छोटी काशी और मिनी क्यूबा के नाम से देशभर में प्रसिद्ध मुक्केबाजों की धरती है। यह हरियाणा केसरी पंडित नेकी राम शर्मा और विकास पुरुष चौधरी बंसीलाल जैसी महान हस्तियों की धरती भी है। यहां के किसानों ने कम पानी और रेतीली मिट्टी में भी पसीना बहाकर खेतों को हरा-भरा रखा है और यहां के युवाओं ने सीमा पर देश की रक्षा की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान को वित्तीय सहायता के साथ-साथ अच्छी खाद, बीज, पानी, बिजली, बीमा, उचित कीमत, बेहतर बाजार और नई तकनीक मिले, इसी सोच के साथ डबल इंजन सरकार बीज से लेकर बाजार तक हर कदम पर किसान के साथ खड़ी है। हरियाणा देश का पहला राज्य है, जहां किसानों की सभी 24 फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही हैं। पिछले 13 सीजन में 12 लाख किसानों के खातों में फसलों की खरीद के 1 लाख 90 हजार करोड़ रुपये पहुंचाए गए हैं।
नकली बीज और कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ बनाया सख्त कानून
उन्होंने कहा कि सब्जियां और फल उगाने वाले किसान भी पीछे न रहें, इसके लिए भावांतर भरपाई योजना के तहत 21 बागवानी फसलों के संरक्षित मूल्य तय किए गए हैं, जिससे 49 हजार किसानों को 282 करोड़ रुपये की राशि मिली है। पिछले 12 वर्षों में फसल बीमा और फसल खराब होने के मुआवजे के रूप में 16 हजार 160 करोड़ रुपये दिए गए हैं। किसान की मेहनत के साथ कोई धोखा न कर सके, इसके लिए नकली बीज और कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाया गया है। फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी प्रधानमंत्री की योजनाएं आज किसानों के लिए सुरक्षा कवच बनी हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों के लिए भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गन्ने का भाव 415 रुपये से बढ़ाकर इस पेराई सीजन में 430 रुपये और अगले सीजन में 450 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इससे अगले सीजन में गन्ना किसानों की आमदनी प्रति एकड़ लगभग 10 हजार से 11 हजार 300 रुपये तक बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को जन आंदोलन बनाया
उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज धरती को मां मानकर उसकी सेहत का ध्यान रखते थे। प्रधानमंत्री जी ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के माध्यम से उसी परंपरा को जन आंदोलन बनाया है और हरियाणा के किसान इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आज लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ जमीन पर प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकरण कराया है, जिनमें से 23 हजार 930 किसान 44 हजार एकड़ जमीन पर इसे अपना चुके हैं। कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल के प्रशिक्षण केंद्रों से 12 हजार से अधिक किसान यह विधि सीख चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भिवानी के किसानों ने पानी की कीमत को अच्छी तरह पहचाना है। इसी कारण पीएम-कुसुम योजना के तहत 75 प्रतिशत सब्सिडी पर 1 लाख 95 हजार 653 सोलर पंप लगाए गए हैं और खेतों की सिंचाई सौर ऊर्जा से की जा रही है। स्वच्छ हवा के लिए किसानों ने पराली प्रबंधन में भी बढ़-चढ़कर सहयोग दिया है। किसानों को 1 लाख 11 हजार उपकरणों और 6 हजार 794 कस्टम हायरिंग सेंटरों के लिए 1 हजार 17 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है और 10 लाख किसानों को 909 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली है।
सरकार ने इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन पार्टनरशिप मॉडल विकसित किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती तभी लाभदायक होगी, जब किसान को उत्पादन के साथ-साथ बाजार का भरोसा भी मिलेगा। इसी कारण सरकार ने इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन पार्टनरशिप मॉडल विकसित किया है, जिसमें बीज से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक पूरी मूल्य श्रृंखला तैयार की जा रही है। हरियाणा का किसान केवल उत्पादक बनकर न रहे, बल्कि अपनी उपज का ब्रांड भी बनाए। सरकार इसी सपने को साकार करने पर जोर दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य का किसान ज्ञान, विज्ञान और तकनीक से लैस होगा। आज ड्रोन के माध्यम से खाद और दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है और मोबाइल पर मौसम तथा मंडी के भाव मिल रहे हैं। आने वाले समय में एआई के माध्यम से फसल की बीमारी, मिट्टी की जरूरत और सिंचाई के सही समय की जानकारी सीधे किसान तक पहुंचेगी। एआई केवल उद्योगों और शहरों के लिए नहीं है, बल्कि इसका सबसे बड़ा लाभ खेतों और किसानों को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि 1 नवंबर को हरियाणा की स्थापना के 60 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इन 60 वर्षों में हरियाणा देश का अन्न भंडार बना है। इसके पीछे किसान का पसीना लगा है। इसलिए हमें गर्व के साथ संकल्प लेना चाहिए कि पानी की हर बूंद बचाएंगे, धरती मां की सेहत सुधारेंगे और नई तकनीक अपनाएंगे।
प्राकृतिक खेती हमारी परंपरा रही है – कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को साल में तीन बार दो-दो हजार रुपये की राशि सीधे उनके खातों में भेजी जाती है। छोटा किसान इसकी महत्ता को अच्छी तरह समझता है। सरकार की ओर से किसानों को पराली प्रबंधन के साथ-साथ मशीनों की खरीद और खाद पर भी सब्सिडी दी जा रही है।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती हमारी परंपरा रही है। इसमें गोवंश का विशेष योगदान रहा है। इसलिए हमें किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसकी शुरुआत पशुओं के लिए उगाए जाने वाले चारे में खाद का इस्तेमाल बंद करके और उसे प्राकृतिक तरीके से उगाकर की जानी चाहिए। इससे पशुओं का दूध शुद्ध और स्वादिष्ट रहेगा।
