चंडीगढ़, 23 अक्टूबर:- हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने राज्य में भूजल स्तर में गिरावट को रोकने, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए फसल विविधीकरण और जल संरक्षण को बेहद महत्वपूर्ण रणनीति बताया है।

उन्होंने कहा कि धान और गन्ने जैसी अधिक पानी की खपत वाली एकल फसलों की लगातार खेती करने के बजाय कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की ओर बढ़ना, पानी की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों में कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है। पानी जैसे बहुमूल्य और महंगे प्राकृतिक संसाधन के अत्यधिक उपयोग को रोकने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना एक अनूठी पहल है। इसके तहत धान की जगह वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

कृषि मंत्री ने बताया कि योजना की शुरुआत में धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें उगाने पर किसानों को 7,000 रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता दी जाती थी। वहीं, वर्तमान में यदि कोई किसान पिछले चार वर्षों से धान की खेती कर रहा था और अब धान छोड़कर अन्य फसलों—जैसे अनाज एवं मक्का, खरीफ की दलहन फसलें (मूंग, अरहर/तूर, उड़द और मोठ), खरीफ के तिलहन (मूंगफली, तिल और अरंडी), रेशेदार फसलें (कपास), खरीफ की सब्जियां (प्याज), बागवानी, चारा फसलें और कृषि वानिकी (यूकेलिप्टस और सफेदा)—की खेती करता है या फिर जमीन को खाली (परती) छोड़ देता है, तो उसे 8,000 रुपये प्रति एकड़ का लाभ दिया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जो किसान पिछले वर्ष इस योजना के तहत पात्र थे, वे भी इस वर्ष लाभ प्राप्त करने के हकदार हैं।

श्री श्याम सिंह राणा ने खरीफ 2026 सीजन की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार लाभार्थियों को 8,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि के साथ-साथ दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को 2,000 रुपये प्रति एकड़ का अतिरिक्त बोनस भी देगी। पूरी सब्सिडी और बोनस राशि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत एक ही किस्त में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

उन्होंने राज्य के किसानों से अपील की कि वे जल संरक्षण के इस बड़े अभियान में भागीदार बनें और फसल विविधीकरण अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए जल और भूमि संसाधनों को सुरक्षित रखें।