हरोली/ऊना, 16 अप्रैल (राजवीर चोपड़ा):- हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून बनाए जाने की मांग को लेकर 1 अप्रैल से शुरू की गई सामाजिक न्याय यात्रा का पहला चरण गुरुवार को ऊना विधानसभा क्षेत्र में संपन्न हो गया। यात्रा का समापन विश्राम गृह ऊना में किया गया।
यह यात्रा चंबा जिले के डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से शुरू होकर चुराह, चंबा सदर, भटियात, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर और सोलन के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए संतोषगढ़ पहुंची।
यात्रा से जुड़े प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक राज्य सरकार अपने चुनावी घोषणा पत्र के अनुरूप SC-ST विकास निधि कानून लागू नहीं करती।
गौरतलब है कि इस कानून की मांग पिछले तीन वर्षों से लगातार उठाई जा रही है। इस उद्देश्य से प्रदेश के लगभग 30 सामाजिक संगठनों ने मिलकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास निधि कानून के लिए राज्य स्तरीय गठबंधन का गठन किया है।
राज्य गठबंधन के प्रतिनिधियों—सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी डी.पी. चंद्रा, सुखदेव विश्वप्रेमी, एडवोकेट नरेश कुमार सैंसोवाल, जिला कांग्रेस कमेटी एससी विभाग के अध्यक्ष बलराम महे, श्री गुरु रविदास महासभा ऊना की जिला प्रधान शकुंतला संधू, नेशनल दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस के राज्य संयोजक राजकुमार महे और हरिचंद संधू—ने बताया कि इस कानून को लागू करवाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक राज्यभर में जिला स्तरीय परामर्श, विधायकों से समर्थन, मुख्यमंत्री को ज्ञापन और ड्राफ्ट बिल प्रस्तुत करने सहित कई पहल की जा चुकी हैं। 15 से अधिक विधायकों ने इस कानून के समर्थन में हस्ताक्षर भी किए हैं।
इस दौरान नेशनल सेंटर फॉर दलित स्टडीज के चेयरपर्सन मालेपल्ली लक्ष्मीया ने तेलंगाना सहित अन्य राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कानून से SC-ST समुदाय की शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार संभव है। उन्होंने कहा कि देशभर में इस कानून की मांग को मजबूती मिल रही है।
यात्रा के दौरान प्रतिनिधियों ने ‘हर घर दस्तक’ अभियान के तहत गांव-गांव जाकर लोगों से समर्थन जुटाने का संकल्प लिया। साथ ही 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर विधायकों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपे गए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और राज्य सरकार से जल्द इस कानून को लागू करने की मांग जारी रहेगी।
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