वैदिक ऋषियों की ज्ञान परंपरा की वाहक हैं महिलाएं डॉ चौहान
नीलोखेड़ी/ करनाल, 20 अगस्त:- उद्यमिता केवल व्यवसाय स्थापित करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और रोजगार सृजन की सशक्त सोच है। ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महिला संसाधन व्यक्तियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने संस्थान में उद्यमिता विकास विषय पर आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए की।
डॉ. चौहान ने कहा कि भारतीय नारी सदैव से साहस, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की प्रतीक रही है। उन्होंने महिला प्रतिभागियों को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और साहस का प्रतीक बताते हुए कहा कि महिलाएं प्राचीन वैदिक ऋषियों की उत्तराधिकारी हैं, जिन्होंने भारतीय ज्ञान, संस्कृति और समाज निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं भी अपनी प्रतिभा, ज्ञान और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण तभी सार्थक होता है, जब उसका प्रभाव समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। महिला संसाधन व्यक्तियों को चाहिए कि वे इस प्रशिक्षण को केवल औपचारिक प्रक्रिया न मानकर ग्रामीण महिलाओं को सफल उद्यमी बनाने के मिशन के रूप में लें। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध अवसरों के आधार पर स्वरोजगार से जोड़ना आत्मनिर्भर हरियाणा और विकसित भारत के संकल्प को मजबूती देगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य महिला संसाधन व्यक्तियों की क्षमता का विकास करते हुए उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने, स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार करने तथा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रभावी प्रशिक्षण प्रदान करना है।
कार्यक्रम के समन्वयक एवं संस्थान के सहायक आचार्य संदीप कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्यों एवं विभिन्न तकनीकी सत्रों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उद्यमिता विकास प्रशिक्षण प्रतिभागियों में नेतृत्व क्षमता, नवाचार, समस्या समाधान एवं व्यवसाय प्रबंधन संबंधी कौशल विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नेशनल स्किल इंस्टीट्यूट, पानीपत से आए विशेषज्ञ एल. पी. भट्ट ने प्रतिभागियों को कौशल विकास, उद्यम स्थापना, आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों तथा उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता निर्माण की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षकों की गुणवत्ता जितनी बेहतर होगी, उद्यमिता विकास के परिणाम भी उतने ही प्रभावी होंगे।
इस अवसर पर संस्थान के सहायक आचार्य कमलदीप सांगवान, सौरभ अरोड़ा, अजय कुमार, मोहित कुमार तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं एवं अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
