पंजाब की पहली ओएलएलआइएफ स्पाइन सर्जरी लिवासा अस्पताल खन्ना में सफलतापूर्वक की गई

खन्ना, 9 सितंबर:- पंजाब में न्यूनतम इनवेसिव स्पाइन देखभाल के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, लिवासा अस्पताल खन्ना में पुरानी कमर दर्द और पैरों में जाने वाले दर्द से पीड़ित 43 वर्षीय महिला की 'ऑब्लिक लैटरल लंबर इंटरबॉडी फ्यूजन' (ओएलएलआइएफ) सर्जरी सफलतापूर्वक की गई।
महिला लंबे समय से लगातार दर्द झेल रही थी, जिससे उसका चलना-फिरना और दैनिक कार्य काफी सीमित हो गए थे। दवाइयों, फिजियोथेरेपी और अन्य गैर-सर्जिकल उपचारों के साथ छह महीने से अधिक समय तक चले कंसर्वेटिव इलाज के बावजूद उसके लक्षणों में कोई सुधार नहीं हुआ। विस्तृत क्लीनिकल इवैल्यूएशन और इमेजिंग से पता चला कि महिला लंबर स्पाइनल अस्थिरता, डिजनरेटिव बदलाव और नर्व कम्प्रेशन से ग्रसित थी।
मरीज की स्थिति और रीढ़ की हड्डी को स्थिरता प्रदान करने की आवश्यकता को देखते हुए, लिवासा अस्पताल खन्ना के कंसल्टेंट - ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, डॉ. संदीप सिंह ने न्यूनतम इनवेसिव ओएलएलआइएफ तकनीक को चुना।
यह सर्जरी एडवांस्ड इमेज गाइडेंस और इंट्राऑपरेटिव इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिकल निगरानी के तहत एक छोटे से चीरे के माध्यम से की गई। न्यूनतम इनवेसिव रास्ते से खराब डिस्क तक पहुँच बनाकर उसे बाहर निकाला गया, जिसके बाद डिस्क की ऊंचाई को बहाल करने और फ्यूजन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बोन ग्राफ्ट सामग्री से भरा हुआ एक इंटरबॉडी केज रखा गया। इसके बाद ऑपरेशन वाले रीढ़ के हिस्से को स्थिर करने के लिए मिनिमली इनवेसिव फिक्सेशन किया गया।
सर्जरी के दौरान बहुत ही कम खून बहा, और प्रक्रिया के तुरंत बाद मरीज को धीरे-धीरे चलना-फिरना शुरू करवा दिया गया। ऑपरेशन के बाद उनकी रिकवरी काफी अनुकूल रही, जिससे वह शुरुआती चरण में ही अपनी गतिशीलता वापस पाने में सक्षम हो गईं।
डॉ. सिंह ने बताया, "ओएलएलआइएफ एक उन्नत मिनिमली इनवेसिव तकनीक है जो हमें आसपास की मांसपेशियों और सॉफ्ट टिश्यूज को नुकसान पहुंचाए बिना लम्बर स्पाइन की चुनिंदा समस्याओं का सटीक इलाज करने में सक्षम बनाती है।"