नवांशहर, 3 अक्तूबर (गुरबख्श सिंह महे):- जिंदगी बहुत अनमोल है और इसके सफर में कब कौन-सा मोड़ आ जाए, इसके बारे में कोई भी कुछ नहीं कह सकता। जब कोई हंसता-खेलता नौजवान अचानक हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह जाता है तो उसके परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और चाहने वालों के लिए इस दुख को सहना बहुत मुश्किल हो जाता है। ये विचार चरणछोह गंगा अमृत कुंड सचखंड श्री खुरालगढ़ साहिब के प्रधान संत सुरिंदर दास, चेयरमैन नाजर राम मान, संत करम चंद, बाबा दयाल चंद बंगा और स्वागत कमेटी के इंचार्ज जगदीश कुमार ने गांव रैल माजरा में कमेटी के प्रेस सचिव गुरबख्श मेहे के करीबी रिश्तेदार रणजीत कुमार के श्रद्धांजलि समारोह के दौरान संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
यहां उल्लेखनीय है कि रणजीत कुमार 19 सितंबर को विदेश से छुट्टी आया था और 24 सितंबर को उसकी तबीयत खराब हो गई तथा पी.जी.आई. चंडीगढ़ में उसी दिन शाम को उसकी मौत हो गई थी। उक्त नेताओं ने कहा कि नौजवान रणजीत कुमार की असमय मौत ने हर उस इंसान को भी अंदर से झकझोर कर रख दिया, जिसके दिल में उसके लिए प्यार और सम्मान था।
किसी भी परिवार के लिए अपने जवान बेटे को खोने का दुख शब्दों में बयान करना आसान नहीं होता। माता-पिता की आंखों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर अनगिनत सपने होते हैं। जब ये सपने अचानक टूट जाते हैं तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। रणजीत कुमार के बिछड़ने की खबर ने भी उसके अपनों के दिलों में ऐसा खालीपन पैदा कर दिया है, जिसे भरना बहुत मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि इंसान की असली पहचान उसके रिश्तों, व्यवहार और लोगों के दिलों में बनाई जगह से होती है। किसी के दुनिया से चले जाने के बाद उसकी यादें, उसके साथ बिताए पल और उसके साथ बनी सांझ ही पीछे रह जाती है। रणजीत कुमार की असमय मौत के बाद उसे याद करने वाले लोगों की भावनाएं इस बात का प्रतीक हैं कि किसी अपने का बिछड़ना कितना गहरा असर छोड़ जाता है।
इस दुख की घड़ी में बिछड़े नौजवान के परिवार के साथ संवेदना व्यक्त करना और उन्हें हौसला देना समाज का नैतिक फर्ज है। ऐसे समय में अपनेपन के दो बोल भी दुखी परिवार के लिए सहारा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी वाहेगुरु के आगे अरदास है कि बिछड़ी आत्मा को अपने चरणों में निवास प्रदान करें और परिवार सहित सभी स्नेहियों को यह असहनीय दुख सहने का बल प्रदान करें। रणजीत कुमार की यादें हमेशा उसे प्यार करने वालों के दिलों में बसी रहेंगी।
इस मौके पर मृतक रणजीत कुमार के बड़े भाई मनजीत कुमार, बहनें कांता रानी, सोनियां चंदड़, बलदेव राज, गुरबख्श सिंह मेहे, गुरबख्श कौर, प्रशोतम नवांशहर, रानी मक्कोवाल, पूर्व सैनिक रूप सिंह, करणवीर, जपनीत मेहे, मुकेश कुमार, नमन बेटा, परमजीत कौर, माता नसीब कौर, प्रदीप कौर, रवि कुमार टौंसा, अनमोल गढ़ी, काकू गढ़ी, अमनदीप कौर गढ़ी, मोहन सिंह गढ़ी, सवित्री देवी, नीशू, उर्वशी, कुसुम समेत कई अन्य सगे-संबंधी और रिश्तेदार उपस्थित थे। पाठी सिंह अमर सिंह, हरदीप सिंह और जोधा सिंह द्वारा अरदास और श्रद्धांजलि समारोह संपन्न करवाया गया।
