श्रीनगर (जगमीत घुम्मन): श्रीनगर और अनंतनाग के दो मरीजों को लिवासा हॉस्पिटल, मोहाली में जटिल स्पाइन सर्जरी के बाद नया जीवन मिला। सोमवार को श्रीनगर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लिवासा हॉस्पिटल, मोहाली के ब्रेन एवं स्पाइन विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने इन दोनों चुनौतीपूर्ण मामलों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि रीढ़ की जटिल बीमारियों के उपचार में विशेषज्ञ सर्जिकल कौशल, मरीज की स्थिति के अनुरूप उपचार योजना और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पहला मामला श्रीनगर के एक मरीज का था, जिसे पहले की गई सर्जरी के बाद रीढ़ में गंभीर संक्रमण हो गया था। यह संक्रमण सेप्सिस से जटिल हो गया, जिससे मरीज की हालत काफी बिगड़ गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि वह न तो बैठ पा रहा था, न खड़ा हो पा रहा था और न ही बिस्तर पर करवट बदल सकता था। उसकी गतिशीलता पूरी तरह प्रभावित होने के कारण उसे आगे के उपचार के लिए स्ट्रेचर पर लिटाकर लिवासा हॉस्पिटल, मोहाली लाया गया।
विस्तृत जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद डॉ. अजय सिंह ने जटिल संक्रमण को दूर करने और रीढ़ से जुड़ी अन्य समस्याओं के उपचार के लिए रिवीजन स्पाइन सर्जरी की। इस सर्जरी में सावधानीपूर्वक योजना बनाने के साथ-साथ ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखना भी आवश्यक था, ताकि उसकी रिकवरी को बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सके।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में उत्साहजनक सुधार देखने को मिला और वह दूसरे ही दिन चलने-फिरने में सक्षम होने लगा। फिलहाल उसकी हालत बेहतर है और वह चिकित्सकीय निगरानी में है। रिकवरी की निरंतर प्रगति पर नजर रखने के लिए उसकी नियमित ओपीडी फॉलो-अप जांच की जा रही है।
दूसरा मामला अनंतनाग की 21 वर्षीय युवती का था, जिसे ग्रेड III–IV डिस्प्लास्टिक स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस नामक रीढ़ की गंभीर बीमारी थी। इस स्थिति में रीढ़ की एक हड्डी दूसरी हड्डी की तुलना में खिसक जाती है, जिससे युवती को बैठने और खड़े होने में काफी परेशानी होती थी। युवती के पिता किसान हैं, इसलिए परिवार के लिए उपचार का खर्च भी एक महत्वपूर्ण विषय था।
विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद डॉ. अजय सिंह ने रीढ़ को सही स्थिति में लाने और स्थिरता प्रदान करने के लिए हाइब्रिड पोस्टेरोलैटरल सर्जिकल तकनीक अपनाने की योजना बनाई। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य अधिक व्यापक सर्कमफेरेंशियल सर्जरी की आवश्यकता से बचते हुए रीढ़ की समस्या को ठीक करना और उसे स्थिर बनाना था। उपचार की रणनीति युवती की चिकित्सकीय स्थिति के अनुरूप तैयार की गई, साथ ही परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया।
सर्जरी के लगभग नौ से दस महीने बाद युवती की स्थिति अच्छी है और वह अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट चुकी है। उसकी रिकवरी इस बात को रेखांकित करती है कि मरीज की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप सर्जरी की योजना बनाना कितना महत्वपूर्ण है, ताकि बेहतर चिकित्सकीय परिणामों के साथ उपचार की व्यावहारिकता और किफायती होने जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखा जा सके।
ये दोनों मामले दर्शाते हैं कि रीढ़ की जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए विशेषज्ञ उपचार और सुनियोजित सर्जिकल हस्तक्षेप किस तरह उनकी गतिशीलता बहाल करने तथा जीवन की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही, ये उदाहरण इस बात पर भी जोर देते हैं कि प्रत्येक मरीज की चिकित्सकीय आवश्यकताओं और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुरूप उपचार की रणनीति तैयार करना आवश्यक है।
