खरड़ (एसएएस नगर), 10 अक्तूबर:- सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग, पंजाब द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान के तहत रयात बाहरा यूनिवर्सिटी, खरड़ में ‘मानसिक स्वास्थ्य और नशे की मांग को कम करना’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, नशों के दुष्प्रभावों और युवाओं को नशों से बचाने के उपायों पर अपने विचार साझा किए।
चर्चा के दौरान मनोवैज्ञानिक श्रीमती प्रनीत कौर, मनोचिकित्सक डॉ. सुखतेज, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्री मेहुल सैनी और बाइक क्लब की श्रीमती शिवानी चौहान ने कहा कि नशे की लत को केवल शारीरिक समस्या के रूप में नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इससे मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक कारक भी जुड़े होते हैं। तनाव, अकेलापन, गलत संगति और व्यक्तिगत समस्याएं कई बार व्यक्ति को नशों की ओर धकेल सकती हैं। इसलिए नशों की रोकथाम के लिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, परिवार का सहयोग और समय पर विशेषज्ञों की सहायता लेना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से स्पष्ट अपील की कि वे अपने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लें और किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव, निराशा या भावनात्मक परेशानी को छिपाने के बजाय अपने माता-पिता, शिक्षकों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को नशों से दूर रहना चाहिए, नशा करने के लिए दोस्तों के दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए और यदि किसी साथी में नशे की लत के लक्षण दिखाई दें, तो उसका मजाक उड़ाने या उसे अकेला छोड़ने के बजाय उचित सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे विद्यार्थियों को बिना किसी झिझक के मनोवैज्ञानिक, काउंसलर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए। मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपने स्वास्थ्य और भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का परिचायक है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, खेलों और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने तथा अपने आसपास सकारात्मक माहौल बनाने के लिए प्रेरित किया।
पैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया का समझदारी से उपयोग करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह के प्रभाव होते हैं। इसलिए कोई भी पोस्ट, टिप्पणी या सामग्री साझा करने से पहले उसके संभावित प्रभाव के बारे में सोचना चाहिए और ऐसी सामग्री साझा करने से बचना चाहिए, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती हो। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने विचार स्वस्थ तरीके से व्यक्त करने और सोशल मीडिया का उपयोग करते समय जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।
अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि नशों के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी प्रयासों से सफल नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए विद्यार्थियों, माता-पिता, शिक्षकों और समाज का सामूहिक सहयोग जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं नशों से दूर रहें, अपने साथियों को भी जागरूक करें और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए समय पर सहायता लेकर एक स्वस्थ तथा नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान दें।
पैनल चर्चा से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा चप्पड़ चिड़ी के फतेह बुर्ज से रवाना की गई ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ बाइक रैली के सवारों के रयात बाहरा यूनिवर्सिटी पहुंचने पर स्वागत किया गया। रैली के समापन पर उनका अभिनंदन भी किया गया। इन बाइक सवारों ने पैनल चर्चा में भी भाग लिया।
इस अवसर पर पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे।
