पटियाला (मनप्रीत सिंह):- बहावलपुर समाज के प्रतिष्ठित समाजसेवी और बहावलपुर वेलफेयर सोसाइटी के संरक्षक सतनाम हसीजा ने कहा कि किसी भी समुदाय की विरासत तभी तक सुरक्षित रहती है, जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति और बच्चा अपनी मातृभाषा में बातचीत करता है और उसे बोलने में गर्व महसूस करता है।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का यह कर्तव्य है कि वे कम से कम अपने घर-परिवार में बहावलपुरी भाषा में बातचीत करें। केवल “जय बहावलपुरी” और “जीवे बहावलपुरी” जैसे खोखले नारों से समाज की तरक्की संभव नहीं है। जब बहावलपुरी समुदाय के लोग आपस में मिलें, तो उन्हें अपनी भाषा में ही बातचीत करनी चाहिए। इसी तरह बैठकों में होने वाली चर्चा भी बहावलपुरी भाषा में होनी चाहिए।

इस विषय पर भाषा विभाग के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. मदन लाल हसीजा से संपर्क किया गया। उन्होंने बहावलपुर समाज के रीति-रिवाजों, त्योहारों, रहन-सहन और अन्य सांस्कृतिक पहलुओं पर शोधपूर्ण लेख अपनी पुस्तकों में संकलित किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज अपनी भाषा भूल गया और अपनी संस्कृति को सुरक्षित नहीं रख पाया, तो उसका नाम दुनिया की ईमानदार, मेहनती और स्वाभिमानी कौमों की सूची से मिट जाएगा।

इसीलिए सतनाम हसीजा ने समाज के सभी लोगों से अपील की कि वे आपसी मतभेद मिटाकर एकजुट हों, एकता का प्रमाण दें और अपनी भाषा व संस्कृति की रक्षा के लिए दृढ़ता से जुट जाएं। उन्होंने अपने बच्चों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।