चंडीगढ़, 22 अक्तूबर:- पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ ने मृतक अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में जागरूकता, तैयारी और समन्वय को मजबूत करने के लिए ‘कॉन्टिनम – द कंटीन्यूटी ऑफ लाइफ’ नामक सीएमई-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।

रोट्टो नॉर्थ द्वारा अस्पताल प्रशासन विभाग के सहयोग से एपीसी ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रो. लाल ने कहा कि दाता परिवार गहरे व्यक्तिगत शोक के बीच अंगदान का विकल्प चुनकर असाधारण साहस का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने दाता परिवारों को अंगदान आंदोलन की नींव बताया और जागरूकता को अस्पताल की दीवारों से आगे गांवों, पंचायतों और समुदायों तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पीजीआईएमईआर के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि अंगदान एक सामूहिक संस्थागत जिम्मेदारी है, जिसके लिए संभावित दाताओं की समय पर पहचान, ब्रेन-स्टेम डेथ का प्रमाणीकरण, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और शोक संतप्त परिवारों के साथ संवेदनशील संवाद आवश्यक है।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण युवा अंगदाता सुरिंदर कौर के परिवार का सम्मान था। उनके चाचा जसपाल सिंह ने कहा कि यह जानकर कि उनके अंगों ने दूसरों को जीवन जीने में मदद की है, उनके दुख को गहरा अर्थ मिला। उन्होंने अधिक परिवारों से अंगदान अपनाने का आग्रह किया।

इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड के विद्यार्थियों ने मानवता, करुणा तथा जीवन और दृष्टि के उपहार का संदेश देते हुए विशेष श्रद्धांजलि प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान अंगदान पर एक प्रशिक्षण संकलन का भी विमोचन किया गया।

रोट्टो नॉर्थ के नोडल अधिकारी डॉ. विजय ताडिया ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों की तैयारी को मजबूत करने तथा पीजीआईएमईआर में मृतक अंगदान की स्थायी संस्कृति विकसित करने के लिए मासिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की परिकल्पना की गई है।

पीजीआईएमईआर के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए। इनमें संभावित दाता की पहचान, ब्रेन-स्टेम डेथ का निदान और प्रमाणीकरण, दाता की स्थिति को अनुकूल बनाना, चिकित्सा-कानूनी और नैतिक पहलू, अंग आवंटन तथा प्रत्यारोपण जैसे विषय शामिल थे।

कार्यक्रम में विभागाध्यक्षों, वरिष्ठ संकाय सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया।

रोट्टो नॉर्थ की सलाहकार (आईईसी/मीडिया) सुश्री सरयू डी. मद्रा ने जोर देकर कहा कि अंगदान शोक को आशा में बदल देता है और प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को जीवन का दूसरा अवसर प्रदान करता है।