साहिबजादा अजीत सिंह नगर/चंडीगढ़, 22 अक्टूबर:- पंजाब सरकार ने अपने प्रमुख अभियान ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ के तहत राज्य के 40 कॉलेजों में संगत मानसिक स्वास्थ्य क्लब शुरू किए हैं। इनका उद्देश्य युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय रहते हस्तक्षेप को प्रोत्साहित करना और नशे की लत को रोकने में मदद करना है। आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट (एबीईटी) के सहयोग और पंजाब के उच्च शिक्षा विभाग के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य शैक्षणिक परिसरों में ऐसा मित्रवत वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थी भावनात्मक परेशानी को पहचान सकें, उचित सहायता प्राप्त कर सकें और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा कर सकें।
इस अनूठी पहल के शुभारंभ के दौरान पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने क्लब के प्रतिभागियों से बातचीत की और युवा सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया। इस चर्चा में सामाजिक कलंक को कम करने, युवाओं को मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित करने और नशे की समस्या से निपटने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों तथा सहपाठी नेटवर्क के बीच आपसी तालमेल के महत्व पर जोर दिया गया।
मोहाली स्थित प्लाक्षा यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि ‘संगत’ जागरूकता, सहपाठियों के सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और नशे की लत से निपटने में सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और अनूठा कदम है। उन्होंने कहा, “भगवान कृष्ण के साथ होने के बावजूद महान योद्धा अर्जुन को भी मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। यह हमें याद दिलाता है कि युवाओं को भी सही मार्गदर्शन और सलाहकारों की आवश्यकता होती है। नशा करना गर्व की बात नहीं है। किसी व्यक्ति को गलत संगति से बाहर निकलने का रास्ता खोजने में मदद करना एक बहुत नेक कार्य है। ‘संगत’ युवाओं द्वारा, युवाओं के लिए तैयार की गई पहल है, जिसका उद्देश्य सहपाठियों के सहयोग को बढ़ावा देना, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाना और युवाओं को अधिक स्वस्थ विकल्प चुनने में मदद करना है।”
आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट और ‘एमपावर’ की संस्थापक एवं चेयरपर्सन नीरजा बिड़ला ने युवाओं में भावनात्मक चुनौतियों, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और नशे की लत के आपसी संबंधों से निपटने के लिए निरंतर और दीर्घकालिक रोकथाम उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आज युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियां केवल नशीले पदार्थों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं हैं। भावनात्मक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण समस्या के शुरुआती चरण में हस्तक्षेप पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। ‘एमपावर’ में ‘सीओपीई’ के तहत किए गए हमारे कार्यों से हमने देखा है कि भावनात्मक परेशानी, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अनसुलझी समस्याएं और नशीले पदार्थों का इस्तेमाल किस प्रकार आपस में जुड़े हो सकते हैं। यह स्थिति निरंतर और रोकथाम संबंधी उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।”
पंजाब सरकार के साझा और दूरदर्शी प्रयासों की सराहना करते हुए बिड़ला ने कहा, “मैं पंजाब सरकार की सराहना करती हूं कि उसने सरकारी विभागों, नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों और सामुदायिक नेताओं को एक साझा लक्ष्य के तहत एकजुट किया है। इसका उद्देश्य विभिन्न स्तरों पर बिखरे हुए प्रयासों से आगे बढ़कर रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और मुख्यधारा में पुनः शामिल करने के लिए एक टिकाऊ ढांचा तैयार करना है। ऐसे सहयोगात्मक मॉडल पंजाब के युवाओं और उनके परिवारों के जीवन पर स्थायी और सार्थक प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं।”
अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अभिनेता अपारशक्ति खुराना ने ऐसा सहयोगपूर्ण वातावरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जहां युवा अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात कर सकें। उन्होंने कहा, “हम अक्सर युवाओं से मजबूत बनने के लिए कहते हैं, लेकिन मजबूती का अर्थ यह भी है कि आप जो कुछ महसूस कर रहे हैं, उसके बारे में ईमानदारी से बात कर सकें और जरूरत पड़ने पर मदद मांग सकें। युवाओं पर पड़ने वाला दबाव हमेशा दिखाई नहीं देता। इसलिए दोस्तों, परिवारों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए ऐसा मित्रवत वातावरण बनाना जरूरी है, जहां युवाओं की बात सुनी जाए, न कि उन्हें सही या गलत के आधार पर परखा जाए।”
उन्होंने आगे कहा, “मेरी दादी कहा करती थीं कि चाहे कितनी भी चुनौतियां क्यों न आएं, अच्छी संगति बहुत जरूरी है।” उन्होंने कहा कि ‘संगत’ जैसी पहल युवाओं को एक-दूसरे का ध्यान रखने और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में अधिक खुलकर बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।
इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक भाग लेने वाले कॉलेज के 25 विद्यार्थियों को ‘यूथ मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड’ (वाईएमएचएफए) का 14 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा और प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को भावनात्मक चुनौतियों के संकेत पहचानने, शुरुआती स्तर पर अपने साथियों की मदद करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें पेशेवर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करने में सक्षम बनाएगा।
ये क्लब मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, भावनात्मक चुनौतियों पर खुलकर बातचीत करने और नशे से दूर रहने के लिए परिसर स्तर पर गतिविधियां आयोजित करेंगे। प्रशिक्षित सहपाठी नेतृत्व और पेशेवर सहायता के माध्यम से यह पहल समय रहते समस्याओं की पहचान करने तथा ऐसा परिसर-संस्कृति विकसित करने का प्रयास करती है, जिसमें मदद मांगने को बुरा नहीं समझा जाता, बल्कि इसके लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
यह कार्यक्रम एबीईटी की सहायक संस्था ‘एमपावर’ द्वारा अपने ‘सीओपीई’ (काउंसलिंग एंड आउटरीच फॉर पीयर एम्पावरमेंट) ढांचे के तहत लागू किया जा रहा है।
शुभारंभ कार्यक्रम में ‘युवा’ के सह-संस्थापक एवं प्रमुख निखिल तनेजा और बॉलीवुड अभिनेता अपारशक्ति खुराना शामिल हुए। उन्होंने युवाओं के कल्याण और ऐसे स्थान बनाने के महत्व पर चर्चा की, जहां युवाओं की बात ध्यान से सुनी जाए, उन्हें समझा जाए और आवश्यक सहायता दी जाए। ‘कॉमिक सिंह’ के नाम से मशहूर पंजाबी हास्य कलाकार मनप्रीत सिंह ने भी कार्यक्रम में प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में शिक्षा अधिकारी, भाग लेने वाले कॉलेजों के नोडल प्रोफेसर, संगत के विद्यार्थी सदस्य और एबीईटी के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मानसिक स्वास्थ्य को रोकथाम की रणनीति का आधार बनाकर ‘संगत’ विद्यार्थियों को अपने साथियों की मदद करने, शुरुआती हस्तक्षेप को मजबूत बनाने और कॉलेज परिसरों को अधिक खुला तथा सहयोगपूर्ण बनाने के लिए सशक्त करने का प्रयास करती है। यह पहल पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान के तहत रोकथाम, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से नशे की समस्या से निपटने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
