चंडीगढ़ (हरमिंदर नागपाल):- क्रिस्टा पाइक को अमेरिका के टेनेसी राज्य में वर्ष 1995 में किए गए एक हत्या के अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। अपराध के समय उनकी उम्र महज 18 वर्ष थी। वह अब तक 31 साल से अधिक समय जेल में बिता चुकी हैं।

30 सितंबर 2026 को उनकी मौत की सजा लागू करने के लिए घातक दवा के दो इंजेक्शन लगाए गए। इसके बावजूद वह जीवित बच गईं और अस्पताल में इलाज के बाद होश में आ गईं। आस्था की दृष्टि से यह घटना सहज ही उस कहावत की याद दिलाती है—“जिसको राखे साईं, मार सके न कोय।” शायद ईश्वर उन्हें जीवन का एक और अवसर देना चाहते हैं।

उनका अपराध बेहद गंभीर और निंदनीय था। मृतका कोलीन स्लेमर और उनके परिवार की पीड़ा को भुलाया नहीं जा सकता।

फिर भी, 18 वर्ष की उम्र में किए गए अपराध के बाद 31 साल से अधिक समय तक कारावास में रहने और अब मौत की इस भयावह प्रक्रिया को सहने के बाद, उन्हें दोबारा मौत के हवाले करने के बजाय शेष जीवन जेल में ही बिताने दिया जाना चाहिए।

मैं भारत के एक नागरिक के रूप में टेनेसी के माननीय गवर्नर और संबंधित अमेरिकी अधिकारियों से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि क्रिस्टा पाइक की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जाए।

न्याय अपनी जगह बना रहे, लेकिन दया के लिए भी जगह होनी चाहिए।

भारत स्थित अमेरिकी दूतावास से विनम्र अनुरोध है कि इस मानवीय अपील को संबंधित अमेरिकी अधिकारियों तक पहुंचाया जाए। इसे पढ़ने वाले सभी सज्जनों से भी निवेदन है कि इस अपील को आगे साझा करें।