अंबाला, 5 नवंबर (आर. सिंह):- इंडियन नेशनल लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह ने हरियाणा सरकार पर शहीद स्मारक के उद्घाटन समारोह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली के आयोजन में सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम के लिए लगभग 1,100 सरकारी रोडवेज बसों का इस्तेमाल किया गया। रैली के लिए इतनी बड़ी संख्या में सरकारी बसों की तैनाती से आम यात्रियों को काफी असुविधा हुई। आम लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसों की कमी और यातायात संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

ओंकार सिंह ने कहा कि चिंता केवल सरकारी बसों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इस कार्यक्रम से बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हुई है। रैली के आयोजन के नाम पर कई स्कूलों को दो दिनों तक बंद रखना पड़ा और शिक्षकों को बच्चों को रैली स्थल तक ले जाने की ड्यूटी भी सौंपी गई। सवाल यह है कि क्या राज्य की शिक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर है कि राजनीतिक रैली के लिए स्कूलों की कक्षाएं रोकनी पड़ें और शिक्षकों को भीड़ जुटाने का काम सौंपने के लिए उनकी मुख्य जिम्मेदारियों से हटा दिया जाए?

उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। उनके बौद्धिक विकास, अनुशासन और भविष्य के लिए नियमित स्कूली शिक्षा बेहद जरूरी है। राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण पढ़ाई में बार-बार आने वाली बाधाएं बच्चों के पाठ्यक्रम को प्रभावित करती हैं, उनकी शैक्षणिक निरंतरता को बाधित करती हैं और यहां तक कि शिक्षकों के लिए निर्धारित शैक्षणिक कार्य पूरा करना भी मुश्किल बना देती हैं। जिन्हें स्कूलों में बेहतर शिक्षा प्राप्त करने, वैज्ञानिक सोच और सवाल पूछने की क्षमता विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए, वे राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन में उलझे हुए हैं।

ओंकार सिंह ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बजाय अपनी रैलियां आयोजित करने में अधिक दिलचस्पी रखती है। शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक, तार्किक और सचेत नागरिक बनाना है, न कि उन्हें किसी राजनीतिक पार्टी के कार्यक्रमों में भीड़ का हिस्सा बनाना। उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक का उद्घाटन एक सरकारी कार्यक्रम था, लेकिन जिस तरह इसे भाजपा की रैली से जोड़ा गया और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया, उससे स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि क्या एक सरकारी कार्यक्रम को कथित तौर पर भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रम में बदल दिया गया था? सरकारी बसों, सरकारी कर्मचारियों, स्कूलों और शिक्षकों का इस्तेमाल किसके आदेश पर किया गया?

ओंकार सिंह ने सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि रैली के लिए लगभग 1,100 सरकारी रोडवेज बसों की तैनाती का आदेश किस अधिकारी या विभाग ने दिया था? क्या इन बसों के इस्तेमाल के लिए रोडवेज विभाग को निर्धारित किराया और अन्य खर्चों का भुगतान किया गया था? यदि भुगतान किया गया था, तो सरकारी खजाने या भाजपा आयोजकों द्वारा जमा कराई गई कुल राशि कितनी थी? यदि बसें बिना भुगतान के उपलब्ध कराई गई थीं, तो सरकारी परिवहन निगम को हुए वित्तीय नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि रैली के लिए स्कूलों में छुट्टियां और शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का आदेश किसने दिया था?

ओंकार सिंह ने मांग की कि सरकार इस पूरे मामले में सरकारी संसाधनों पर हुए खर्च और उनके इस्तेमाल का पूरा विवरण सार्वजनिक करे तथा निष्पक्ष जांच कराए।