मोहाली:- एस.ए.एस. नगर मोहाली के फेस-11 में नियुक्त रही एम.कॉम. की जाली डिग्री वाली पूर्व प्रिंसिपल परमजीत कौर के पति जगमोहन सिंह बराड़ को चौकसी विभाग की जांच को प्रभावित करने की कोशिश के आरोपों के तहत माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट, एस.ए.एस. नगर मोहाली की अदालत द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 452 के तहत 1 वर्ष, धारा 214 के तहत 1 वर्ष, धारा 186 के तहत 9 महीने और धारा 189 के तहत 3 महीने की सजा सुनाई गई है।

यहां जारी लिखित प्रेस बयान में गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन पंजाब के पूर्व प्रांतीय प्रेस सचिव हरनेक सिंह मावी ने कहा कि जाली डिग्री वाले अध्यापकों के प्रति विभागीय लापरवाही समाज के लिए बेहद घातक है। इससे विद्यार्थियों, योग्य उम्मीदवारों और सरकारी खजाने को तिहरा नुकसान होता है।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए पूर्व शिक्षक नेता ने बताया कि सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल फेस-11 की पूर्व प्रिंसिपल परमजीत कौर बराड़ की एम.कॉम. की जाली डिग्री संबंधी शिकायतकर्ता जसविंदर सिंह मावी ने बाकायदा आठ वर्ष पहले लिखित शिकायत देकर यह मामला सामने लाया था।

उन्होंने बताया कि इसके बाद शिक्षा विभाग द्वारा शिकायतकर्ता की लगातार पैरवी के कारण संबंधित आरोपी प्रिंसिपल को दो बार निलंबित तो किया गया, लेकिन हर बार विभागीय ढिलाई और मामले को ठंडे बस्ते में डालने की टालमटोल वाली नीति के कारण आरोपी प्रिंसिपल आसानी से सेवानिवृत्त होने में सफल हो गई।

शिकायतकर्ता द्वारा मामला चौकसी विभाग के ध्यान में लाने के बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा अंतिम समय तक चौकसी विभाग को कार्रवाई करने की मंजूरी देने से टालमटोल करना भी विभागीय बदनीयती को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

स्थिति की विडंबना यह है कि मामले को उसके अंतिम अंजाम तक पहुंचाने के लिए शिकायतकर्ता को थक-हारकर शिक्षा विभाग से मुकदमा चलाने की मंजूरी जारी करवाने के लिए माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा।

इस पूरी प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए हरनेक सिंह मावी ने कहा कि जाली डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल करके संबंधित आरोपी प्रिंसिपल ने अपने अधीन पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों के साथ अन्याय किया। इसके साथ ही एक योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों के साथ-साथ सरकारी खजाने पर भी खुली चोट की गई।

उन्होंने कहा कि यह मामला महज एक उदाहरण है। यदि शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों में जाली डिग्री वालों की विस्तृत जांच करवाई जाए तो ऐसे अयोग्य लाभार्थियों की बड़ी संख्या सामने आएगी।

उन्होंने पंजाब सरकार से जोरदार मांग की कि विद्यार्थियों के भविष्य से संबंधित महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षा विभाग में ऐसे अयोग्य उम्मीदवारों तथा उनकी सरपरस्ती करने वाले विभागीय अधिकारियों की पहचान करके उनके खिलाफ मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई की जाए।