चंडीगढ़, 23 अक्टूबर:- हरियाणा में नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जनवरी से सितंबर 2026 तक 6,824 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नशा तस्करी से जुड़ी 19.52 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है। यह जानकारी आज यहां मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय नारको कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) समिति की 14वीं बैठक में दी गई।
मुख्य सचिव ने नशा तस्करी के मामलों में प्रवर्तन कार्रवाई, अभियोजन प्रक्रिया को मजबूत करने, वित्तीय जांच तथा नशामुक्ति और पुनर्वास से संबंधित उपायों की समीक्षा की। बैठक में राष्ट्रीय मादक पदार्थ रोकथाम रोडमैप 2026-29 के तहत विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही कार्रवाई और पिछली राज्य स्तरीय बैठक में लिए गए निर्णयों पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई।
हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री संजय कुमार ने बताया कि जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान अटैच की गई संपत्तियों का मूल्य पिछले वर्ष की इसी अवधि के 5.92 करोड़ रुपये से बढ़कर 19.52 करोड़ रुपये हो गया है। इसमें लगभग 230 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। संपत्ति अटैच किए जाने से संबंधित व्यक्तियों की संख्या भी 78 से बढ़कर 163 हो गई है, जो 108.97 प्रतिशत की वृद्धि है।
ये आंकड़े नशा तस्करी से जुड़ी वित्तीय संपत्तियों की पहचान करने और उनके खिलाफ लक्षित कार्रवाई करने पर राज्य सरकार के बढ़ते ध्यान को दर्शाते हैं। राज्य सरकार ने दिसंबर 2026 तक 30 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अतिरिक्त, 15.09 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों से संबंधित मामले दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन हैं।
श्री संजय कुमार ने बताया कि जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर की संख्या 39.93 प्रतिशत बढ़कर 2,722 से 3,809 हो गई है। गिरफ्तारियों की संख्या 26.53 प्रतिशत बढ़कर 5,393 से 6,824 हो गई है। वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित मामलों की संख्या भी 346 से बढ़कर 380 हो गई है, जो 9.83 प्रतिशत की वृद्धि है।
मादक पदार्थों की बरामदगी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हेरोइन की बरामदगी 43.176 किलोग्राम से लगभग दोगुनी होकर 84.695 किलोग्राम हो गई है, जबकि अफीम की बरामदगी 235.550 किलोग्राम से बढ़कर 430.300 किलोग्राम हो गई है। कोकीन की बरामदगी में 194.47 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 2.96 किलोग्राम और एमडी/एमडीएमए की बरामदगी में 235.51 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 1.76 किलोग्राम की बरामदगी दर्ज की गई है।
बैठक में अभियोजन प्रक्रिया के परिणामों में सुधार पर भी चर्चा की गई। दोषसिद्धि दर 53.33 प्रतिशत से बढ़कर 58.34 प्रतिशत हो गई है, जो 5.01 प्रतिशत अंकों की वृद्धि है। अभियोजन निदेशालय के साथ समन्वय करके एनडीपीएस अधिनियम के 50 मामलों को विशेष निगरानी के लिए चुना गया है। इनमें से एक मामले में दोषसिद्धि के बाद 14 वर्ष के कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा में नशा तस्करी के 12 गिरोहों की पहचान की गई है और उन्हें खत्म करने के लिए कार्रवाई जारी है। इसके अलावा, 29 घोषित अपराधियों की पहचान की गई है। दो ब्लू कॉर्नर नोटिस और एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है तथा इस संबंध में दिल्ली स्थित नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के साथ मामला उठाया गया है। जिलों को लुकआउट नोटिस जारी करने और पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्ष 2022 से अब तक 163 आदतन नशा अपराधियों को निवारक निरोध (प्रिवेंटिव डिटेंशन) के तहत रखा गया है। जनवरी 2026 से मार्च 2027 तक 70 व्यक्तियों को निवारक निरोध में रखने के राज्य के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला-वार लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं।
जांच की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मुख्यालय में विशेष जांच और वित्तीय जांच प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है। अब तक चार प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के माध्यम से 139 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित सभी मामलों में वित्तीय जांच करने के निर्देशों पर जोर दिया गया है।
डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली नशे से संबंधित गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में एक समर्पित प्रकोष्ठ विकसित किया जा रहा है। जुलाई 2026 से एक साइबर विशेषज्ञ की सेवाएं सलाहकार के रूप में ली जा रही हैं।
गुप्त रूप से संचालित सिंथेटिक ड्रग प्रयोगशालाओं की पहचान करने के लिए थाना प्रभारियों, पुलिस चौकी प्रभारियों और गश्ती कर्मचारियों को आवश्यक जानकारी दी गई है। ऐसी गतिविधियों का पता लगाने में मदद के लिए पुलिस थानों और पुलिस अधीक्षकों के कार्यालयों में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा निर्धारित रेड-फ्लैग संकेतक प्रदर्शित किए गए हैं।
1. 3 अक्टूबर को हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और आबकारी एवं कराधान विभाग की संयुक्त बैठक में मादक पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पूर्वगामी रसायनों की निगरानी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने पर सहमति बनी। यूआरएन रखने वाली फर्मों का विवरण साझा किया गया है, जिसका आबकारी एवं कराधान विभाग ने सत्यापन किया है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने केमिस्ट दुकानों में सीसीटीवी प्रणालियों की जांच और रिकॉर्डिंग को दोबारा प्राप्त करने की व्यवस्था की जांच के लिए एक प्रक्रिया का मसौदा तैयार किया है। मुखबिरों और प्रवर्तन कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हरियाणा एंटी-नारकोटिक्स अवॉर्ड नीति-2026 का मसौदा मंजूरी के लिए पुलिस महानिदेशक को भेजा गया है।
बैठक में नशामुक्ति और पुनर्वास सुविधाओं को मजबूत करने संबंधी प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। हरियाणा के सभी 127 नशामुक्ति केंद्रों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत निर्धारित पंजीकरण प्रणाली के दायरे में लाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।
इसके अलावा, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के एनडीपीएस प्रभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त वैज्ञानिक कर्मचारियों की नियुक्ति और ग्रुप-सी कर्मचारियों के सेवा नियमों को अधिसूचित करने के प्रस्तावों पर चर्चा की गई, ताकि मादक पदार्थों की जांच रिपोर्ट समय पर तैयार करके अदालतों में प्रस्तुत की जा सके।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, डॉ. जी. अनुपमा, श्री ए.के. सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
