चंडीगढ़, 15 अक्तूबर:- हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश के बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) में रहने वाले बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण वैधानिक एडवाइजरी जारी की है। आयोग की अध्यक्ष कुमारी तृप्ति श्योराण ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ए) के तहत यह कदम उठाया है। आयोग के दौरों के दौरान सामने आया कि कई संस्थानों में सीसीटीवी सिस्टम निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप से जुड़े हुए हैं, जिससे लाइव फुटेज कहीं से भी देखी, डाउनलोड या वायरल की जा सकती है। यह बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सीसीटीवी सिस्टम, उसकी फुटेज और पासवर्ड पर केवल संस्थान के प्रभारी का नियंत्रण रहेगा और साझा पासवर्ड के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। कैमरों को किसी भी निजी मोबाइल फोन या लैपटॉप से जोड़ना सख्त मना है और रिमोट एक्सेस को डिफॉल्ट रूप से बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, सीसीटीवी मॉनिटर की तस्वीर लेने, स्क्रीन रिकॉर्डिंग करने या फुटेज को व्हाट्सऐप, सोशल मीडिया अथवा अन्य माध्यमों से डाउनलोड, कॉपी या प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

आयोग ने बताया कि बच्चों की निजता का विशेष ध्यान रखते हुए शौचालयों, स्नानघरों और कपड़े बदलने की जगहों के अंदर कैमरे लगाना किशोर न्याय मॉडल नियम, 2016 के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए संस्थानों को अधिकृत उपयोगकर्ताओं और फुटेज निकालने का रजिस्टर रखना होगा, जिसमें तारीख, उद्देश्य और प्राप्तकर्ता का विवरण दर्ज किया जाएगा।

आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, सभी उपायुक्तों और जिला बाल संरक्षण अधिकारियों को इस एडवाइजरी के अनुपालन की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सौंपने के निर्देश दिए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। आयोग का मानना है कि सीसीटीवी निगरानी का उद्देश्य केवल संस्थागत सुरक्षा और बाल संरक्षण होना चाहिए, न कि बच्चों की निजता का उल्लंघन। बच्चों के सर्वोत्तम हित और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए इस एडवाइजरी को सख्ती से लागू किया जा रहा है।