करनाल, 23 अक्टूबर (प्रवीण वालिया):- हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल और लंबे बिजली कटों ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरों से लेकर दुकानों और कारोबार तक लोग प्रभावित हो रहे हैं। करनाल से पूर्व लोकसभा प्रत्याशी एवं कांग्रेस नेता दिव्यांशु बुद्धिराजा ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री एवं करनाल के मौजूदा सांसद मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से तीखे सवाल करते हुए जवाबदेही मांगी है।

बुद्धिराजा ने सवाल उठाया कि वर्षों से महंगाई का बोझ झेल रही जनता को आखिर कब तक बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा? वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की कुछ श्रेणियों में बिजली दरें घटाकर राहत दी थी, जबकि अप्रैल 2025 में हरियाणा में कुछ घरेलू श्रेणियों की दरों में बढ़ोतरी हुई। अब बिजली वितरण में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका को लेकर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा? क्या सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि निजीकरण के नाम पर जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहें?

दिव्यांशु बुद्धिराजा ने कहा, “मनोहर लाल खट्टर जी, आप हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, करनाल के मौजूदा सांसद हैं और आज केंद्रीय ऊर्जा मंत्री हैं। फिर हरियाणा की जनता बिजली संकट से राहत के लिए किससे जवाब मांगे? मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी बताएं कि लंबे बिजली कटों से परेशान लोगों को राहत कब मिलेगी और कर्मचारियों की मांगों का समाधान कब होगा? सरकार को जवाब देना होगा कि निजीकरण से जनता और कर्मचारियों को क्या मिलेगा, क्योंकि कहीं ऐसा न हो कि फायदा निजी कंपनियों का हो और कीमत आम आदमी चुकाए।”

उन्होंने आगे कहा कि बिजली कोई विलासिता नहीं, बल्कि हर परिवार की बुनियादी जरूरत है। बच्चों की पढ़ाई, घरों के काम, दुकानदारों का कारोबार और छोटे उद्योग—सब बिजली पर निर्भर हैं। जब बिजली गुल होती है, तो सिर्फ घर अंधेरे में नहीं डूबते, बल्कि आम आदमी की दिनचर्या और रोजी-रोटी भी प्रभावित होती है। सरकार जनता की इस परेशानी को नजरअंदाज नहीं कर सकती।

दिव्यांशु बुद्धिराजा ने कहा कि विपक्ष का धर्म जनता की आवाज बनना और सत्ता से जवाब मांगना है। कांग्रेस बिजली कर्मचारियों के हितों और आम उपभोक्ताओं के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से उठाती रहेगी।

जनता को बहाने नहीं, बिजली चाहिए; लंबे कट नहीं, राहत चाहिए; और निजीकरण पर चुप्पी नहीं, स्पष्ट जवाब चाहिए। भाजपा सरकार बताए—आखिर जनता की बुनियादी जरूरतों के प्रति उसकी जवाबदेही कहां है?