चंडीगढ़, 23 अक्टूबर:- मानवता की सेवा और समाज के प्रति समर्पण की मिसाल पेश करते हुए 90 वर्षीय हरबंस सिंह के परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान किया। परिवार ने 17 अक्टूबर 2026 को उनका पार्थिव शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के शरीर रचना विज्ञान विभाग को दान कर दिया।

गुरदासपुर निवासी और सरकारी स्कूल से सेवानिवृत्त गणित व्याख्याता हरबंस सिंह ने 4 सितंबर 2015 को कानूनी वसीयत के माध्यम से देहदान की इच्छा व्यक्त की थी। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी शरीर चिकित्सा शिक्षा, शोध और भावी डॉक्टरों के प्रशिक्षण के माध्यम से मानवता की सेवा कर सकता है। उनकी तीन बेटियों यदविंदर कौर, अमनदीप कौर और डॉ. हरसिमरन कौर सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी इच्छा पूरी की।

बेटियों ने कहा कि पिता की इच्छा पूरी करना उनके लिए गर्व की बात है। इस कठिन समय में उन्हें यह संतोष है कि उनके पिता का अंतिम योगदान भविष्य के डॉक्टरों की शिक्षा और चिकित्सा विज्ञान की प्रगति में सहायक बनेगा।

हरबंस सिंह का जीवन शिक्षा, आध्यात्मिकता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने गणित, राजनीति विज्ञान, इतिहास और शिक्षा में चार स्नातकोत्तर डिग्रियां हासिल की थीं। सिख मूल्यों और मानवीय सेवा में उनकी गहरी आस्था थी। वह चिकित्सा पेशे को मानवता की महान सेवा मानते थे और चिकित्सा विज्ञान में विशेष रुचि रखते थे। जरूरतमंदों की सहायता के लिए वह नियमित रूप से पिंगलवाड़ा संस्था को दान भी देते थे।

जीवन के अंतिम 12 वर्षों में वह अल्जाइमर रोग से पीड़ित रहे। इसके बावजूद देहदान के प्रति उनके विचार परिवार के लिए प्रेरणा बने रहे। वह मृत्यु से जुड़ी रूढ़ियों और अंधविश्वासों में विश्वास नहीं रखते थे तथा देहदान को समाज को लौटाने का सार्थक माध्यम मानते थे।

पीजीआईएमईआर के शरीर रचना विज्ञान विभाग ने इस योगदान के लिए परिवार का आभार व्यक्त किया। देहदान से चिकित्सा विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना समझने और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलती है।

देहदान/शव संरक्षण हेल्पलाइन, पीजीआईएमईआर: 0172-2755201 (कार्यालय समय), 9660030095 (24 घंटे)।