नीलोखेड़ी/करनाल 24 जून:- हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, नीलोखेड़ी में इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों ने शहर का भ्रमण कर विभाजन के समय नीलोखेड़ी में आकर बसे वरिष्ठ नागरिकों से संवाद किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने उनसे 1947 के भारत विभाजन के समय झेली गई कठिनाइयों, विस्थापन की परिस्थितियों, पुनर्वास और नीलोखेड़ी में नए जीवन की शुरुआत से जुड़े अनुभवों को विस्तार से जाना।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं दयाल सिंह कॉलेज, करनाल से आए विद्यार्थियों ने बुजुर्गों के साक्षात्कार रिकॉर्ड किए और उनकी जीवन यात्रा को दस्तावेजी रूप में संकलित किया। विद्यार्थियों ने जाना कि किस प्रकार विभाजन के दौरान लाखों विस्थापित परिवारों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा तथा नीलोखेड़ी को शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए एक आदर्श बस्ती के रूप में विकसित किया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि नीलोखेड़ी केवल एक शहर नहीं, बल्कि संघर्ष, पुनर्निर्माण और आत्मनिर्भरता की एक जीवंत गाथा है। नई पीढ़ी को अपने इतिहास और उन लोगों के त्याग व संघर्ष से परिचित कराना आवश्यक है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में यहां नया जीवन स्थापित किया। ऐसे प्रयास युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ इतिहास के प्रति संवेदनशील भी बनाते हैं।
डॉ. चौहान ने बताया कि इन साक्षात्कारों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर एक डॉक्यूमेंट्री तैयार की जा रही है, जिसका प्रदर्शन जुलाई माह में आयोजित होने वाले “नीलोखेड़ी उत्सव” में किया जाएगा। इस डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य नई पीढ़ी को नीलोखेड़ी के इतिहास, विभाजन की त्रासदी तथा पुनर्वास के संघर्षों से परिचित कराना है।
विद्यार्थियों ने कहा कि बुजुर्गों के अनुभव सुनना उनके लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा। इन साक्षात्कारों के माध्यम से न केवल इतिहास को संरक्षित किया जा रहा है, बल्कि उन लोगों के संघर्ष और साहस को भी सम्मान दिया जा रहा है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में नया जीवन स्थापित किया।
इस अवसर पर इंटर्नशिप कर रहे छात्र रेखा, सोनू, मनीषा राणा, अर्पिता कुंडु एवं तनिष्का शर्मा सहित संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी सौरभ अरोड़ा भी उपस्थित रहे तथा डॉक्यूमेंट्री निर्माण के लिए आवश्यक जानकारी एवं समन्वय में सहयोग प्रदान किया।
