चंडीगढ़ (जगमीत घुमन):- “एनेस्थीसियोलॉजिस्ट किसी प्रक्रिया से पहले मरीज के स्वास्थ्य और जोखिमों का आकलन करते हैं, सर्जरी के दौरान उनके महत्वपूर्ण शारीरिक अंगों की निगरानी करते हैं और सर्जरी के बाद दर्द प्रबंधन के साथ रिकवरी में सहायता प्रदान करते हैं। आधुनिक एनेस्थीसिया केवल मरीज को सुलाने या बेहोश करने से कहीं अधिक है।”

मैक्स अस्पताल, मोहाली के सीनियर डायरेक्टर – एनेस्थीसिया एवं पेन मैनेजमेंट डॉ. वाई. के. बत्रा ने कहा, “एनेस्थीसिया मरीजों को बिना किसी दर्द या परेशानी के सर्जरी और अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं से गुजरने में मदद करता है। प्रक्रिया और मरीज की स्थिति के आधार पर, इसमें जनरल एनेस्थीसिया, स्पाइनल या एपिड्यूरल जैसी रीजनल एनेस्थीसिया, लोकल एनेस्थीसिया या सेडेशन शामिल हो सकती हैं।”

एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका सर्जरी से काफी पहले शुरू होती है और रिकवरी तक जारी रहती है। मरीज के मेडिकल इतिहास, दवाओं, एलर्जी और एनेस्थीसिया के पिछले अनुभवों का विस्तृत आकलन संभावित जोखिमों की पहचान करने और उन्हें प्रबंधित करने में मदद करता है।

डॉ. बत्रा ने आगे बताया कि ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसियोलॉजिस्ट सांस लेने की प्रक्रिया, ऑक्सीजन स्तर, ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों की लगातार निगरानी करते हैं। मरीज की स्थिति और सर्जरी की आवश्यकताओं के अनुसार एनेस्थीसिया को सावधानीपूर्वक समायोजित किया जाता है।

यह जिम्मेदारी अप्रत्याशित स्थितियों, महत्वपूर्ण संकेतों में बदलाव, अत्यधिक रक्तस्राव और प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली अन्य चुनौतियों को संभालने तक विस्तृत होती है। सर्जरी के बाद भी एनेस्थीसियोलॉजी टीम मरीज की रिकवरी, दर्द प्रबंधन और अन्य तत्काल चिंताओं में सहायता जारी रखती है।

डॉ. बत्रा ने जानकारी दी कि एनेस्थीसियोलॉजी का योगदान केवल ऑपरेशन थिएटर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एनेस्थीसियोलॉजिस्ट क्रिटिकल केयर, एयरवे मैनेजमेंट, मैकेनिकल वेंटिलेशन, इमरजेंसी मेडिसिन और दर्द प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।