मोहाली, 24 सितंबर:- पंजाब राज पेंशनर महासंघ के सूबा प्रधान डॉ. एन.के. कलसी, जनरल सचिव जोगिंदर सिंह और प्रेस सचिव गुरबख्श सिंह ने सांझे बयान में कहा कि पंजाब सरकार द्वारा महंगाई भत्ते को केंद्र सरकार के पैटर्न से डिलिंक करने की कोशिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने पंजाब सरकार से 23-9-2026 को जारी पत्र में जरूरी संशोधन करके मुलाजिमों और पेंशनरों को डीए/डी.आर. की बकाया किश्तें 1-7-2023 से 46 फीसदी और 1-1-2024 से 50 फीसदी की बनती तिथियों से देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ता बढ़ रही महंगाई को ध्यान में रख कर दिया जाता है और पंजाब में यह केंद्र सरकार की तर्ज पर देने का फैसला किया गया था। केंद्र सरकार अपने मुलाजिमों और पेंशनरों को हर छह महीने बाद 1 जनवरी और 1 जुलाई से डीए अदा करती है। उन्होंने दोष लगाया कि पंजाब में डीए को केंद्र सरकार से डिलिंक करने कारण 1-7-2023 से 1-1-2026 तक की 6 किश्तें, कुल 18 फीसदी डीए, बकाया हैं और इस समय केवल 42 फीसदी डीए दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब में काम कर रहे आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को केंद्र के पैटर्न अनुसार 60 फीसदी डीए दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 18-9-2026 को मुख्यमंत्री के साथ मुलाजिमों और पेंशनर जत्थेबंदियों की मीटिंग दौरान 8 फीसदी डीए देने का ऐलान किया गया था, पर 23-9-2026 के पत्र में यह 8 फीसदी डीए 1-9-2026 से देने के हुक्म हैं। पत्र में 1-7-2023 से 4 फीसदी और 1-1-2024 से 4 फीसदी डीए देने बारे स्पष्ट नहीं किया गया।

डॉ. कलसी ने कहा कि पेंशनरों द्वारा केंद्र के पैटर्न अनुसार डीए लेने के हक संबंधी हाई कोर्ट में केस दायर किए गए हैं। 3-8-2026 को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा केंद्र के पैटर्न अनुसार बनता डीए 15 दिनों के अंदर अदा करने के हुक्म दिए गए थे, पर पंजाब सरकार द्वारा अभी तक यह लागू नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि 1-1-2016 से पेंशनें संशोधन समय 125 फीसदी डीए की बजाय 113 फीसदी डीए मर्ज करके 2.4495 फैक्टर लागू किया गया था। पेंशनरों का दोष है कि इससे उनके साथ अन्याय हुआ। उन्होंने कहा कि अगर 1-1-2026 से पेंशनें संशोधन समय भी यही फार्मूला लागू किया गया तो 60 फीसदी की जगह केवल 50 फीसदी डीए मर्ज होगा, जो पेंशनरों के लिए और नुकसानदायक होगा।