हिसार, 27 मार्च:- राजकीय महाविद्यालय हिसार के मनोविज्ञान विभाग में दिव्यांग एकाधिकार पुनर्वास ट्रस्ट के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन विषय पर एक उच्चस्तरीय एवं व्यवहारिक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एम.ए. मनोविज्ञान प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष तथा बी.ए. के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सक्रिय सहभागिता निभाई।  कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक प्राध्यापक डॉ. चंद्रकांत गोरसी के स्वागत अभिभाषण से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान युग में मानसिक स्वास्थ्य केवल एक विषय नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण जीवन की गुणवत्ता, कार्यक्षमता एवं सामाजिक समायोजन का आधार है। 
कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक राजपाल सिंह बासनीवाल (संस्थापक, दिव्यांग एकाधिकार पुनर्वास ट्रस्ट) एवं सह-प्रशिक्षक डॉ. निधि कालरा ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य की अवधारणा, उसके प्रमुख प्रकारों, निर्धारक कारकों तथा उसके जीवन पर पडऩे वाले व्यापक प्रभावों के विषय में वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति की संज्ञानात्मक, भावनात्मक एवं व्यवहारिक संतुलन की अवस्था है, जो उसके निर्णय, संबंधों एवं व्यक्तित्व विकास को प्रत्यक्ष रुप से प्रभावित करती है। 
प्रशिक्षकों ने बताया कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक एवं गतिशील जीवनशैली में तनाव एक सामान्य लेकिन गंभीर चुनौती बन चुका है। यदि इसका समय पर प्रभावी प्रबंधन न किया जाए, तो यह चिंता, अवसाद एवं अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं का कारण बन सकता है। अत: तनाव प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों-जैसे माइंडफुलनेस, श्वसन अभ्यास, संज्ञानात्मक पुनर्गठन एवं व्यवहारिक अभ्यास-का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है।
         कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न प्रायोगिक गतिविधियों एवं मनोवैज्ञानिक अभ्यासों के माध्यम से यह सिखाया गया कि वे अपने दैनिक जीवन में तनाव की पहचान, नियंत्रण एवं प्रबंधन किस प्रकार कर सकते हैं। इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों में आत्म-जागरुकता एवं मानसिक संतुलन को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
विभागाध्यक्ष डॉ. निर्मल कौशिक ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन का यह प्रशिक्षण मनोविज्ञान के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने इसे विद्यार्थियों के व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ उनके भविष्य के पेशेवर क्षेत्र में भी उपयोगी बताया। इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक डॉ. कन्नुप्रिया एवं डॉ. चंद्रकांत गोरसी सहित अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। 
कार्यक्रम का समापन विभागाध्यक्ष डॉ. निर्मल कौशिक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य प्रशिक्षक राजपाल सिंह बासनीवाल एवं सह-प्रशिक्षक डॉ. निधि कालरा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। 
अंत में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि इस कार्यशाला से उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, उसके प्रकार, कारणों एवं समाधान के व्यावहारिक पक्ष की गहन समझ प्राप्त हुई, जिसे वे अपने जीवन में प्रभावी रुप से लागू कर सकेंगे।