चण्डीगढ़- श्री चैतन्य गौड़ीय मठ, सेक्टर 20 के 56वें वार्षिक धर्म सम्मेलन, रामनवमी महोत्सव एवं जन्म शताब्दी समापन समारोहों का आयोजन अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौड़ीय मठ संस्थान के अध्यक्ष एवं आचार्य श्री भक्ति विचार विष्णु जी महाराज जी के सानिध्य में किया जा रहा है। 
मठ संस्थान के प्रवक्ता जेपी गुप्ता ने बताया कि आज वैष्णवता जात-पात व ऊँच-नीच से परे विषय पर आधारित व्याख्यान देते हुए भक्ति विचार विष्णु महाराज जी ने कहा कि वैष्णवता मूलतः प्रेम, करुणा और समानता पर आधारित जीवन दर्शन है, जो जात-पात और ऊँच-नीच जैसे सामाजिक भेदभाव से पूरी तरह मुक्त है। 
यह भक्ति मार्ग में सभी को समान मानती है, जहाँ ईश्वर के समक्ष भक्त की जाति नहीं, बल्कि समर्पण भाव ही प्रधान है। यह मानववादी मूल्यों और भाईचारे पर जोर देती है।वैष्णव विचारधारा में ईश्वर सभी में व्याप्त हैं, इसलिए किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। 
यह विचारधारा 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई' के सिद्धांत पर चलती है, जो लोक सेवा और मानवतावाद को सर्वोच्च मानती है। संतों का मानना है कि सच्चा वैष्णव वही है जो जात-पात के अभिमान से मुक्त होकर हरि भक्ति में लीन हो। वैष्णव आंदोलन ने ऐतिहासिक रूप से समाज के उपेक्षित वर्गों को भक्ति मार्ग में जोड़कर समानता स्थापित की है। 
संक्षेप में, वैष्णवता मानवतावाद का शाश्वत भाव है, जो जात-पात की संकीर्ण दीवारों से ऊपर उठकर विश्व कल्याण की भावना विकसित करता है। आज तीसरे दिन महापौर सौरव जोशी तथा पंजाब के एडीजीपी एलके यादव मुख्य अतिथि थे।