अंबाला, 7 जुलाई:- शहर के पंचायत भवन में आयोजित जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में उस समय हंगामा हो गया, जब राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा जिला प्रशासन के रवैये से नाराज हो गए और अधिकारियों को चेतावनी देते हुए बैठक से वॉक आउट कर गए। उन्होंने प्रशासन द्वारा सांसद फंड के तहत प्रस्तावित विकास परियोजनाओं को लगातार रद्द किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया।
बैठक के दौरान शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि जिला प्रशासन जानबूझकर उनके द्वारा प्रस्तावित जन कल्याण परियोजनाओं में देरी कर रहा है। अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए सांसद ने घोषणा की, "यदि जिला प्रशासन इसी तरह मेरे प्रस्तावों को रद्द करता रहेगा, तो इस दिशा बैठक में मेरे मौजूद रहने का कोई मतलब नहीं है।" इसके बाद वे अपनी कुर्सी से उठे और बैठक छोड़कर चले गए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जनहित से समझौता करना अस्वीकार्य है और अधिकारियों को अपनी ड्यूटी पूरी लगन और जवाबदेही के साथ निभानी चाहिए।
इस घटना के दौरान शर्मा को अंबाला के लोकसभा सदस्य वरुण चौधरी का समर्थन मिला। चौधरी ने भी प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि न केवल राज्यसभा सदस्य बल्कि उनके प्रस्तावित विकास प्रोजेक्ट्स को भी बेवजह रोका जा रहा है। जन प्रतिनिधियों के इस सख्त रुख ने अधिकारियों में खलबली मचा दी। दोनों सांसदों की नाराजगी ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समीक्षा के दौरान यह खुलासा हुआ कि एमपी एरिया डेवलपमेंट फंड के तहत मंजूर कई विकास कार्य तय समय सीमा के बावजूद अधूरे थे। राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि हर जन कल्याण योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
अधिकारियों के प्रदर्शन से असंतुष्ट कार्तिकेय शर्मा ने एक लापरवाह अधिकारी के तबादले के आदेश भी दिए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। वॉक आउट के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया, "जो अधिकारी प्रदर्शन नहीं करेगा, उसे हटा दिया जाएगा। जन विकास कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में दिशा समिति के निर्देशों की अनदेखी हुई, तो वे संसद में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने जैसे संवैधानिक विकल्पों पर विचार करेंगे। कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पर दबाव डालना नहीं, बल्कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करना और शासन में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने दोहराया कि जनहित सबसे ऊपर है और विकास कार्यों में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।