खरड़, 6 अगस्त- भाजपा जिला के जिला व्यापार सेल के प्रधान सुभाष अग्रवाल ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली 'आप' सरकार की मुलाजिमों और पेंशनरों के प्रति नकारात्मक और सरकारी मुलाजिम विरोधी सोच को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। अदालत ने महंगाई भत्ते (डीए) के बकाए रोकने के लिए सरकार द्वारा दी गई हर दलील को रद्द कर दिया।
अग्रवाल ने कहा कि अदालत में हार के बाद भी पंजाब सरकार वही पुरानी दलीलें दोहरा कर मुलाजिमों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, जिनको हाई कोर्ट अपने विस्तृत फैसले में पहले ही खारिज कर चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार को अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए, न कि मुलाजिमों को भ्रमित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार तनख्वाह कमीशन की सिफारिशों को अपनी सहूलियत अनुसार लागू नहीं कर सकती। अगर सरकार ने संशोधित तनख्वाह स्केल मंजूर किए हैं तो उसी अनुसार डीए देने से भी पीछे नहीं हट सकती। अदालत ने यह भी कहा कि मूल तनख्वाह और महंगाई भत्ता अलग-अलग उद्देश्यों के लिए होते हैं और दोनों की तुलना करके मुलाजिमों के कानूनी हकों से इनकार नहीं किया जा सकता।
वित्तीय संकट का हवाला देने वाली सरकार की दलील को भी अदालत ने रद्द करते हुए कहा कि आर्थिक मुश्किलों के नाम पर मुलाजिमों और पेंशनरों के बनते हक नहीं रोके जा सकते। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विज्ञापनों और अन्य गैर-उत्पादक खर्चों को मुलाजिमों के बकाए रोकने का जायज कारण नहीं बनाया जा सकता
उन्होंने कहा कि यह सरकार हर फ्रंट पर फेल हुई है सरकार द्वारा सिर्फ विज्ञापनबाजी पर लोगों का पैसा उड़ाया जा रहा है आज यह सरकार लोगों को बिजली पानी और बढ़िया सड़कों तक नहीं दे पाई।
विज्ञापनों और प्रचार के लिए पैसा है पर मुलाजिमों और पेंशनरों के हकों के लिए नहीं अग्रवाल
