करनाल, 14 अगस्त:-  हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा कि 1947 का विभाजन केवल रेखाओं का खिंचाव नहीं था, बल्कि यह दिलों का, परिवारों का और संस्कृतियों का विभाजन था। दुनिया के इतिहास का यह सबसे बड़ा मानवीय पलायन था, जिसमें करोड़ों लोग शरणार्थी बनने पर मजबूर हुए। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता का यह सूर्य कितनी भारी कीमत चुका कर उगा था। 
यह आयोजन हमें न केवल अतीत की उस त्रासदी से सीख लेने की प्रेरणा देता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, शांति और देश की एकता को अक्षुण्ण रखने का संकल्प भी दिलाता है। विभाजन की त्रासदी को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति द्वेष पैदा करना नहीं, बल्कि उन कठिन परिस्थितियों और मानवीय पीड़ा को स्मरण करना है, ताकि आने वाली पीढियांं इतिहास से सीख लेकर देश की एकता और अखंडता को और मजबूत करें।
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण शुक्रवार को स्थानीय मंगलसेन सभागार में जिला स्तरीय विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। उन्होंने भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इससे पहले कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लोगों तथा विस्थापित परिवारों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर वर्ष 1947 के विभाजन की विभीषिका पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रसारण किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि विभाजन के समय लोगों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अनेक परिवारों को रातों-रात अपना घर छोडऩा पड़ा। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी असहनीय पीड़ा झेली। उन्होंने कहा कि विस्थापित होकर भारत आए लोगों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिश्रम, साहस और संघर्ष के बल पर नए जीवन की शुरुआत की तथा देश और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 
उन्होंने कहा कि आज हमें उन सभी लोगों के संघर्ष और त्याग को याद करते हुए आपसी भाईचारे, सद्भाव और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए। भारत की ताकत उसकी विविधता में एकता है और हमें मिलजुल कर देश को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम में असंध के विधायक योगेंद्र राणा ने कहा कि 14 अगस्त देश के इतिहास का वह सबसे पीड़ादायक अध्याय है, जिसे हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं। यह दिन उन लाखों लोगों के असीम साहस, संघर्ष और बलिदान को नमन करने का है, जिन्होंने 1947 के विभाजन के दौरान अपनी मातृभूमि, अपने आशियाने और अपनों को खो दिया था। असंख्य लोगों ने अपने प्राण गंवाए और परिवारों को अपनों से बिछड़ने की पीड़ा झेलनी पड़ी।
इस अवसर पर भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रवीन लाठर ने कहा कि आज हम सब यहां एक ऐसे इतिहास को स्मरण करने के लिए एकत्र हुए हैं, जिसके घाव आज भी समय के पन्नों पर जीवित हैं। आज का दिन यानी 14 अगस्त, हमारे देश के इतिहास का वह सबसे पीड़ादायक अध्याय है, जिसे हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं। यह दिन उन लाखों लोगों के असीम साहस, संघर्ष और बलिदान को नमन करने का है, जिन्होंने 1947 के विभाजन के दौरान अपनी मातृभूमि, अपने आशियाने और अपनों को खो दिया था।
कार्यक्रम में रेणू बाला गुप्ता ने कहा कि 1947 का विभाजन केवल रेखाओं का खिंचाव नहीं था, बल्कि यह दिलों का, परिवारों का और संस्कृतियों का विभाजन था। दुनिया के इतिहास का यह सबसे बड़ा मानवीय पलायन था, जिसमें करोड़ों लोग शरणार्थी बनने पर मजबूर हुए। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता का यह सूर्य कितनी भारी कीमत चुका कर उगा था। यह आयोजन हमें न केवल अतीत की उस त्रासदी से सीख लेने की प्रेरणा देता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, शांति और देश की एकता को अक्षुण्ण रखने का संकल्प भी दिलाता है।
कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका के पीड़ितों तिलक राज खुराना, संतोष अत्रेजा, ओमप्रकाश अत्रेजा, सुमित्रा कुकरेजा, परमानंद खुराना, लाजपत चौधरी, ज्ञान प्रकाश कुकरेजा, डॉ. गोपाल कृष्ण और शरद भाटिया ने उस समय के अपने कटु अनुभवों को मंच पर साझा किया जिसे सुनकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। 
इस अवसर पर कार्यक्रम की सयोजक और पूर्व चेयरपर्सन रोजी मलिक ने भी विभाजन विभिषिका के इतिहास की उस सच्चाई को अवगत कराया। जो पीड़ा हमारे देश शरणार्थियों सहन की थी। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों से सीख लेकर हम सब यह प्रण ले कि हम देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को बनाए रखेगे।
इस अवसर पर असंध विधायक योगेंद्र राणा, सांसद मनोहर लाल के प्रतिनिधि कविंद्र राणा , डीसी डॉ आनंद कुमार शर्मा, एडीसी डॉ राहुल रईया, एसडीएम देवेंद्र शर्मा,एसडीएम देवेंद्र शर्मा, जिला परिषद के सीईओ अमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, गणमान्य व्यक्ति तथा बड़ी संख्या में जिलावासी उपस्थित रहे।