पटियाला:- पटियाला घराने से जुड़ी पंजाबी संगीत जगत की बड़ी शख्सियत उस्ताद पूरन शाह कोटी जी के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शायरों की दुनिया के संरक्षक प्रो. संधू वरियाणवी तथा प्रधान जगदीश राणा ने कहा कि सूफी गायकी के स्तंभ के रूप में प्रसिद्ध उस्ताद पूरन शाह कोटी का चले जाना उनके परिवार के साथ-साथ सूफी पंजाबी संगीत प्रेमियों के लिए भी बड़ा आघात है।
उन्होंने कहा कि पूरन शाह कोटी द्वारा गाए गए प्रसिद्ध सूफी कवियों के कलाम, जैसे शाह हुसैन आदि की काफ़ी "रब्बा मेरे हाल दा महरम तूँ" तथा "सईयो नी असी नैनां दे आखे लगे" और बाबा बुल्ले शाह का कलाम "उठ गए गवांडों यार रब्बा हुन की करीए", आज भी पहले की तरह सुने जाते हैं और आत्मा को शांति प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि जहां उन्होंने जीवन भर केवल सूफी कलाम ही गाया, वहीं उनके पुत्र मास्टर सलीम ने बॉलीवुड सहित विश्व भर में नाम कमाया है। उनसे गायकी की शिक्षा लेने वाले प्रसिद्ध गायक हंस राज हंस तथा दिवंगत साबर कोटी, जसबीर जस्सी, रंजन रोमी जैसे नाम प्रतिष्ठित गायकों में गिने जाते हैं।
उनके शिष्यों के भी आगे बहुत से शिष्य हैं। उस्ताद बरकत सिद्धू तथा उस्ताद पूरन शाह कोटी को पंजाब में सूफी गायकी के स्तंभ के रूप में जाना जाता रहा है। उनके जैसे गाने वाला अब पंजाब में शायद ही कोई हो।
शायरों की दुनिया के महासचिव प्रसिद्ध ग़ज़लकार गुरदीप सिंह सैणी, सचिव व्याख्याता जसविंदर सिंह जस्सी तथा कोषाध्यक्ष गुरनाम बावा ने कहा कि उस्ताद पूरन शाह कोटी के इस स्थायी वियोग से संगीत जगत तथा साहित्यिक जगत में शोक की लहर फैल गई है।
इनके अलावा विश्व पंजाबी सभा कनाडा के भारतीय प्रधान व्याख्याता बलवीर कौर रायकोटी, साहित्य कला एवं सांस्कृतिक मंच के प्रधान डॉ. कंवल भल्ला, स्विंदर संधू, प्रो. अकवीर कौर, पंजाब साहित्यिक मंच के प्रधान कुलविंदर गाखल, अमर सिंह, हरजिंदर जिंदी, महिला काव्य मंच से माधवी अग्रवाल, अदबी दुनिया के प्रधान जगदीश डालिया, मित्तर मंजीत, कीमती कैसर, दुआबा साहित सभा लुधियाना झिक्का के प्रधान गुरदीप मुकद्दम, दुआबा साहित सभा गढ़शंकर से पवन भम्मियां, प्रिंसिपल गुरजंट सिंह तथा नवीन चेतना पंजाबी लेखक मंच से मक्खण लुहार, शाम सरगूंदी, गुरमुख लुहार आदि के अलावा अन्य साहित्यकार सतपाल साहलों, रेशम चित्रकार, शाम सुंदर, रणजीत पोसी, देस राज बाली, हरदियाल होशियारपुरी, जरनैल साखी, दलजीत महिमी, लाली करतारपुरी, सीरत सिखिआर्थी, मनोज फगवाड़वी आदि कवियों ने भी उस्ताद पूरन शाह कोटी को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
