चंडीगढ़ 12 अक्टूबर 2025: वरिष्ठ हरियाणा पुलिस अधिकारी एडीजीपी श्री वाई. पूरन कुमार द्वारा 7 अक्टूबर 2025 को की गई आत्महत्या ने प्रशासनिक तंत्र की गहन विफलता और समाज में व्याप्त जातिवाद की गंभीर समस्या को उजागर किया। अपने अंतिम संदेश में उन्होंने दोषी वरिष्ठ अधिकारियों का नाम लिया, जिन पर मानसिक उत्पीड़न और अनुचित दबाव डालने का आरोप है। यह घटना अनुसूचित जाति के खिलाफ सामाजिक और प्रशासनिक अन्याय की गहन पहचान भी है।
एडीजीपी पूरन कुमार ने अपने 30 वर्षों के पुलिस करियर में न्यायप्रियता और ईमानदारी के लिए सेवा दी। उनकी यह त्रासदी केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता और सामाजिक भेदभाव का संकेत है।
इस दुखद घटना के विरोध और न्याय की मांग में आज आम आदमी पार्टी, चंडीगढ़ ने सेक्टर 22 स्थित अरोमा लाइट्स प्वाइंट चौक से शांतिपूर्ण लेकिन जोरदार मोमबत्ती मार्च निकाला। मार्च का नेतृत्व पार्टी अध्यक्ष विजयपाल सिंह ने किया। बड़ी संख्या में पार्टी नेता, कार्यकर्ता, पार्षद और नागरिक शामिल हुए।
विजयपाल सिंह ने कहा, "यह आत्महत्या केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का संकेत है। एडीजीपी पूरन कुमार ने जिन अधिकारियों का नाम अपनी अंतिम चिट्ठी में लिया, उनके खिलाफ तुरंत निष्पक्ष जांच और कार्रवाई होनी चाहिए। अनुसूचित जाति के खिलाफ रची गई साजिश अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
महासचिव ओमकार सिंह औलाख ने कहा, "हम आज केवल श्रद्धांजलि देने नहीं आए हैं। यह संदेश है कि अन्याय और उत्पीड़न को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन और सरकार अब अपनी जिम्मेदारी उठाएं।"
मार्च में शामिल अन्य नेताओं में पी पी घई, एडवोकेट खुर्चा, योगेश ढींगरा (प्रवक्ता), प्रेमलता, हरदीप, मनौर, जस्विंदर कौर (एल ओ पी), अंजू कटियाल, रामचंद्र यादव, शादाब राठी, हरजिंदर बावा, विक्रांत ए तंवर स्टेट मीडिया इंचार्ज शामिल थे। सभी ने मोमबत्तियां जलाकर एडीजीपी पूरन कुमार की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और न्याय की मांग को जोरदार तरीके से उठाया।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह मोमबत्ती मार्च सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति और समाज के खिलाफ हो रहे अन्याय के विरोध का जन संदेश है। प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त जातिवाद और पक्षपाती रवैये को अब सहन नहीं किया जाएगा। दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।
"हम विशेष रूप से अनुसूचित जाति के नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए खड़े हैं। प्रशासन में बैठे उच्च अधिकारी भी अब यह जान लें कि जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ जनता की आंखें खुली हैं। यह केवल एक मोमबत्ती मार्च नहीं, बल्कि पूरे समाज में न्याय और समानता की लड़ाई की शुरुआत है। हम सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी जाति विशेष के खिलाफ अन्याय को कभी नजरअंदाज न किया जाए।"
"आज का मार्च यह दिखाता है कि जनता न्याय के पक्ष में हमारी ताकत है। यह केवल एक मोमबत्ती मार्च नहीं, बल्कि जन आंदोलन की शुरुआत है। हम इसे हर ज़िले, हर शहर तक ले जाएंगे ताकि सरकार और प्रशासन पर दबाव बन सके।
 एडीजीपी पूरन कुमार की हत्या सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता और अनुसूचित जाति के खिलाफ हो रहे अन्याय का संकेत है। हम हर स्तर पर लड़ेंगे ताकि दोषियों को सजा मिले और न्याय सुनिश्चित है।