करनाल, 14 जनवरी:- करनाल में आवारा कुत्तों का खतरा एक बार फिर सामने आया है। घर के पास खेल रहे एक बच्चे पर तीन-चार कुत्तों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्चे को शरीर के कई हिस्सों में काट लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और किसी तरह उसे कुत्तों के चंगुल से बचाया। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और लोग बच्चों को बाहर भेजने से डर रहे हैं।
घायल बच्चे राजदक्ष ने बताया कि वह घर पर था और उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। उसने मां से अनुमति लेकर थोड़ी देर बाहर खेलने के लिए गया था। उसकी मां घर के बाहर धूप में बैठी हुई थी। बच्चा सड़क की दूसरी तरफ पहुंचा ही था कि तभी तीन-चार कुत्तों ने उस पर झपट्टा मार दिया और काटना शुरू कर दिया। अचानक हुए हमले से वह संभल नहीं पाया और जमीन पर गिर गया।
**मां और पड़ोसी ने बचाई जान
बच्चे के शोर मचाने पर उसकी मां तुरंत मौके पर पहुंची। उसी समय एक पड़ोसी भी वहां आ गया। दोनों ने मिलकर कुत्तों को भगाया और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद बिना देरी किए परिवार उसे अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने घावों की सफाई की और कई जगह टांके लगाए। साथ ही आवश्यक इंजेक्शन भी लगाए गए।
**पहले भी काट चुका है कुत्ता, फिर भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई
बच्चे की मां रूबी ने बताया कि गली में एक कुत्ता ऐसा है, जिसने पहले भी कई लोगों को काटा है। नगर निगम की टीम कुछ समय पहले कुत्तों को पकड़कर ले गई थी, लेकिन बाद में उन्हें वापस छोड़ दिया गया। इसके बाद से वही कुत्ता और ज्यादा आक्रामक हो गया है। अब गली से निकलते समय भी डर बना रहता है कि कहीं फिर किसी पर हमला न कर दे।
**बाइक सवारों के पीछे दौड़ते हैं कुत्ते, हादसों का खतरा
बच्चे के पिता अजय ने बताया कि आवारा कुत्ते कभी पैदल चल रहे लोगों के पीछे दौड़ते हैं तो कभी बाइक सवारों का पीछा करते हैं, जिससे गिरने और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। उनका कहना है कि इलाके में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
**नगर निगम में शिकायत की तैयारी
परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों को यहां से हटाकर किसी सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए, ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसी घटना न हो। इसके लिए नगर निगम में शिकायत दर्ज कराई जाएगी। लोगों की मांग है कि केवल पकड़कर छोड़ने की बजाय ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
