इंदौर/होशियारपुर, 30 सितंबर:- कैंसर आज दुनिया की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल है। कैंसर के निदान के बाद मरीज और उसके परिवार के सामने उपचार, दुष्प्रभाव, दर्द, मानसिक तनाव और जीवन की गुणवत्ता से जुड़े अनेक सवाल खड़े होते हैं। इसी विषय को लेकर वरिष्ठ संवाददाता दलजीत अजनोहा ने देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, इंदौर के एम.डी. डॉ. अजय हार्डिया के साथ इलेक्ट्रो होम्योपैथी और कैंसर उपचार से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष बातचीत की।
डॉ. हार्डिया लंबे समय से इलेक्ट्रो होम्योपैथी को कैंसर देखभाल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की बात करते रहे हैं। देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, संस्थान में इलेक्ट्रो होम्योपैथी एवं हर्बल मेडिसिन आधारित उपचार दृष्टिकोण पर काम किया जाता है।
इलेक्ट्रो होम्योपैथी को इसके समर्थकों द्वारा एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से पौधों से प्राप्त तैयारियों के इस्तेमाल और शरीर के विभिन्न अंगों तथा रक्त एवं लसीका तंत्र को संतुलित करने पर जोर दिए जाने की बात कही जाती है। हालांकि, इलेक्ट्रो होम्योपैथी को लेकर वैज्ञानिक प्रमाणों की स्थिति को समझना भी उतना ही आवश्यक है।
कैंसर के संदर्भ में इलेक्ट्रो होम्योपैथी के समर्थकों की ओर से यह दावा किया जाता है कि इससे मरीजों को दर्द, सूजन, कमजोरी तथा बीमारी से जुड़े कुछ लक्षणों में राहत मिल सकती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। डॉ. हार्डिया के अनुसार उनका संस्थान कैंसर मरीजों के लिए एक वैकल्पिक एवं समग्र उपचार दृष्टिकोण पर काम कर रहा है। अस्पताल की वेबसाइट पर भी इलेक्ट्रो होम्योपैथी के माध्यम से बड़ी संख्या में कैंसर मरीजों के उपचार तथा कई मरीजों को राहत मिलने का दावा किया गया है।
हालांकि, ऐसे संस्थागत दावे और मरीजों के अनुभव अपने आप में उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक प्रमाण के समान नहीं माने जा सकते। उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य में पारंपरिक होम्योपैथी और कैंसर के संबंध में अभी तक ऐसा निर्णायक प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे यह स्थापित हो कि होम्योपैथी कैंसर को ठीक कर सकती है। साथ ही, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी और पारंपरिक होम्योपैथी अलग-अलग पद्धतियां हैं, इसलिए पारंपरिक होम्योपैथी पर हुए शोध के निष्कर्षों को सीधे इलेक्ट्रो होम्योपैथी पर लागू नहीं किया जा सकता।
कैंसर मरीजों के लिए उपचार का निर्णय बीमारी के प्रकार, उसकी स्टेज, मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह के आधार पर किया जाना चाहिए। किसी भी वैकल्पिक या पूरक चिकित्सा को अपनाने से पहले अपने ऑन्कोलॉजिस्ट या उपचार कर रहे डॉक्टर से चर्चा करना आवश्यक है। अप्रमाणित उपचार के कारण स्थापित कैंसर उपचार में देरी करना या उसे बंद करना मरीज के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
इसी संदर्भ में इलेक्ट्रो होम्योपैथी की प्रभावशीलता और कैंसर उपचार में इसकी वास्तविक भूमिका को समझने के लिए व्यवस्थित क्लिनिकल ट्रायल, स्वतंत्र वैज्ञानिक शोध, पारदर्शी परिणाम और विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की आवश्यकता है। भारत में विभिन्न वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों पर शोध के लिए केंद्रीय स्तर पर संस्थान भी कार्य कर रहे हैं।
वरिष्ठ संवाददाता दलजीत अजनोहा के साथ हुई इस विशेष बातचीत में इलेक्ट्रो होम्योपैथी की अवधारणा, कैंसर मरीजों में इसके उपयोग, उपचार के दौरान दर्द एवं अन्य लक्षणों से राहत, जीवनशैली, खान-पान, मरीजों की उम्मीदों तथा इस वैकल्पिक पद्धति से जुड़े वैज्ञानिक प्रमाणों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जुड़े किसी भी उपचार को लेकर मरीज और उनके परिवार के लिए उम्मीद के साथ-साथ वैज्ञानिक प्रमाण, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह और उपचार की सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहद महत्वपूर्ण है। यही इस विशेष बातचीत का प्रमुख संदेश रहा।
