नई दिल्ली:- राजस्थान हाई कोर्ट (जोधपुर) ने 'जनरेशन जेड', 'जनरेशन अल्फा' और 'जनरेशन बीटा' से जुड़े मुद्दों का स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने जंक फूड, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, प्रश्नपत्र लीक, ग्रामीण स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के युग में बुनियादी सीखने की क्षमताओं में कमी की आशंका पर चिंता जताई है। 1997 और 2012 के बीच पैदा हुए व्यक्तियों को 'जनरेशन जेड' के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जबकि 2013 और 2024 के बीच पैदा हुए लोगों को 'जनरेशन अल्फा' माना जाता है। 2025 और 2039 के बीच पैदा होने वाले बच्चों को 'जनरेशन बीटा' के नाम से जाना जाएगा।
सोमवार को जस्टिस अनूप कुमार ढंड की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने स्कूल कैंटीन और स्कूल गेटों के 50 मीटर के दायरे में वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगा दी। प्रतिबंधित वस्तुओं में कार्बोनेटेड ड्रिंक, चिप्स, ट्रांस-फैट वाले बेकरी उत्पाद और अन्य जंक फूड शामिल हैं। अदालत ने प्रत्येक स्कूल को चार सप्ताह के भीतर एक 'स्कूल फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमेटी' गठित करने का निर्देश दिया है, जिसमें शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन समितियों का विवरण शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए।
अदालत ने आगे निर्देश दिया कि मिड-डे मील योजना और अन्य पोषण संबंधी कार्यक्रम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के संतुलित आहार संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार हों। अदालत ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए एक समर्पित पोर्टल और हेल्पलाइन स्थापित करने का भी आदेश दिया।
पीठ ने बच्चों में बढ़ते 'मोबाइल स्क्रीन टाइम' और तकनीक पर उनकी अत्यधिक निर्भरता पर चिंता जताई। यह स्वीकार करते हुए कि एआई और 'डिजिटल लर्निंग' विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिए आवश्यक हैं, अदालत ने चेतावनी दी कि तकनीक को बुनियादी और मुख्य सीखने के कौशलों का स्थान नहीं लेना चाहिए। 'डिजिटल लर्निंग' और पारंपरिक तरीकों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए अदालत ने हस्तलेखन, किताबें पढ़ने, नोट्स लिखने, स्वतंत्र सोच और लिखित परीक्षाओं के महत्व को रेखांकित किया।
पीठ ने बार-बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक पर भी चिंता जताई। अदालत ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और अकादमिक योजना पर इनके प्रतिकूल प्रभाव के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में जनता के विश्वास के क्षरण को भी रेखांकित किया। अदालत ने ऐसे लीक को रोकने के लिए पूरी तरह सुरक्षित प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता जताई।
अदालत ने अधिकारियों को ग्रामीण और दूरदराज के सरकारी स्कूलों में कमियों को दूर करने के निर्देश दिए, विशेष रूप से शिक्षकों के रिक्त पदों, स्मार्ट कक्षाओं, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता सुविधाओं, पेयजल और खेल संबंधी बुनियादी ढांचे के संबंध में।
इसके अलावा, अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को 'जनरेशन जेड' के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक योजना तैयार करने को कहा, जिसमें शिक्षा और रोजगार के बीच का अंतर, गिग वर्करों के लिए सामाजिक सुरक्षा, किफायती छात्रावास और आवासीय सुविधाएं, 'डिजिटल डिटॉक्स' कार्यक्रम, डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा शामिल हैं।
वकीलों को तीनों युवा पीढ़ियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों की जांच में अदालत की सहायता के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। मामले को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
हाई कोर्ट के अहम आदेश स्कूल गेटों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर रोक
