मोगा, 30 सितंबर:- बड़े ही दुखी और भरे मन से यह लिखना पड़ रहा है कि 'हास-व्यंग अकादमी पंजाब रजि. मोगा' के प्रधान, प्रसिद्ध हास-व्यंगकार और साहित्य के सच्चे सेवक श्री के. एल. गर्ग जी सदा के लिए बिछुड़ गए हैं। उनके अचानक बिछोह की खबर ने साहित्यिक जगत के साथ-साथ उनसे प्यार करने वाले हर दिल को गहरा सदमा पहुंचाया है।
श्री के. एल. गर्ग जी सिर्फ एक हास-व्यंगकार ही नहीं थे, बल्कि वह एक ऐसे संवेदनशील साहित्यकार थे, जिन्होंने अपनी कलम के माध्यम से समाज की कमजोरियों को हास्य और व्यंग्य के रूप में बड़ी सहजता से पेश किया। उनकी रचनाएं पाठकों के चेहरों पर मुस्कान लाने के साथ-साथ समाज के बारे में सोचने के लिए भी मजबूर करती थीं।
उनकी मीठी बोली, सादगी भरा स्वभाव, मिलनसार चेहरा और हर किसी के साथ प्यार-सत्कार से पेश आने की अदा हमेशा याद रहेगी। वह साहित्यकारों के लिए एक साथी, नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा और पंजाबी हास-व्यंग्य की दुनिया के लिए एक सम्माननीय नाम थे।
आज उनके जाने से एक इंसान ही नहीं, बल्कि हंसी में सच कहने वाली एक बुलंद आवाज हमसे सदा के लिए दूर हो गई है। उनकी कलम भले ही खामोश हो गई है, पर उनके द्वारा रचा गया साहित्य और उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी।
यह बिछोह कभी पूरा न होने वाला घाटा है। इस दुख की घड़ी में हम शोक-संतप्त परिवार के साथ दिल से हमदर्दी प्रकट करते हैं और परमात्मा से अरदास करते हैं कि बिछड़ी रूह को अपने चरणों में सदा निवास बख्शे और परिवार, स्नेहीजनों और साहित्यिक साथियों को यह असह्य दुख सहने का हौसला दे।
सुखदर्शन गर्ग, मंगत कुलजिंद, रमेश गर्ग, साधू राम लंगेआना, कंवलजीत भोला, जगदीश राय कुलरियां, जसवीर भलूरिया, अमरजीत सिंह पेंटर, दविंदर सिंह गिल, गुरदेव खोखर, जगमेल सिंह जठौल, जगन नाथ, सुखदेव राम, बिक्रम जीत नूर, लखवीर भट्टी की ओर से श्री के. एल. गर्ग जी को कोटि-कोटि प्रणाम और दिल की गहराइयों से भावभीनी श्रद्धांजलि।
