लुधियाना, 24 अक्टूबर:- पंजाबी लोक विरासत अकादमी, लुधियाना के अध्यक्ष प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने वेरका के मूल निवासी, अमृतसर के प्रमुख वकील और प्रतिष्ठित पंजाबी कवि अजीब सिंह हुंदल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

7 दिसंबर, 1939 को जन्मे अजीब सिंह हुंदल की आयु लगभग 86 वर्ष थी। उन्होंने अपने काव्य सफर की शुरुआत पंजाबी ग़ज़लकार के रूप में की, लेकिन बाद में मुक्त छंद में कविता लिखने लगे। वेरका में रहते हुए वह पंजाबी उपन्यासकार मोहन काहलों के करीबी साथी थे।

उनकी प्रमुख रचनाओं में *अजे ना गिण* (ग़ज़लें), *फैसले तों बाद* (1983), *मिट्टी साहवें खड़ा वारिस* (1991), *अपना अपना कुरुक्षेत्र* (1996) और *कचहरी विच खड़ा दरख्त* (1992) शामिल हैं।

भाषा विभाग, पंजाब ने भी उन्हें शिरोमणि पंजाबी कवि के रूप में सम्मानित किया था।