होशियारपुर:- पिहोवा जिसे प्रथूदक तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है मान्यताओ के अनुसार अकाल मृत्यु होने पर पिहोवा तीर्थ पर क्रियाकर्म करने पर मृतक आत्माओं को प्रेत रूप से मुक्ति मिलती है। प्रति दिन लोग अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए पिहोवा तीर्थ पर पूजा, दान, तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान करवाने के लिये देश-विदेश से पिहोवा तीर्थ पर पहुंचते है।  
मान्यताओं के अनुसार श्री राम चन्द्र जी ने अपने पिता महाराज दशरथ जी का पिंडदान इसी प्रांची सरस्वती (पिहोवा) में किया। उसके बाद भगवान श्री कृष्ण जी पांडवों को पिहोवा तीर्थ पर लेकर आये। पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण जी के कहने पर कौरवों की मुक्ति के लिये इसी पिहोवा की पुण्य भूमि पर कर्म, पूजा, अनुष्ठान करवाया था।
 तभी से आज तक प्रतिदिन लोग अपने पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए पिहोवा तीर्थ पर अनुष्ठान करवाने आते है। जिससे मृतक आत्माओं को मोक्ष प्रदान होता है।
         इसी पिहोवा (पृथुदक) की भूमि पर भगवान शिव जी के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिक महाराज का मंदिर है। जहाँ पिहोवा में किये गए पूजा-अनुष्ठान के साक्षी कार्तिक महाराज पर तेल का अभिषेक (चढ़ाया) किया जाता है। यहाँ कार्तिक महाराज जी के मंदिर में महिलाओं का प्रवेश नहीं होता।