चंडीगढ़:- पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (ट्रॉमा एंड बर्न्स) की ओर से 24 अक्टूबर, 2026 को हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के 57 डॉक्टरों के लिए इमीडिएट ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट एवं बर्न मैनेजमेंट (ITLS & BM) प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया गया। यह पाठ्यक्रम भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय ट्रॉमा एवं बर्न चोट निवारण एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NPPMTBI) के अंतर्गत आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य ट्रॉमा और जलने से होने वाली चोटों के कारण होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों एवं जटिलताओं को कम करना, स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमता को सुदृढ़ करना, उपचार प्रोटोकॉल को मानकीकृत करना तथा अस्पतालों में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत बनाना था।
इस पाठ्यक्रम का नेतृत्व डॉ. अतुल पराशर ने किया, जो पाठ्यक्रम निदेशक, PGIMER चंडीगढ़ के प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (ट्रॉमा एंड बर्न्स) के नोडल अधिकारी हैं। एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. निधि भाटिया ने पाठ्यक्रम की सह-निदेशक के रूप में कार्य किया, जबकि डॉ. अंकित दादरा पाठ्यक्रम समन्वयक रहे। प्रशिक्षण में ट्रॉमा और जलने से घायल मरीजों के प्रारंभिक मूल्यांकन एवं प्रबंधन के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण पर विशेष ध्यान दिया गया।
डॉ. अतुल पराशर ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पांच लाख से अधिक लोग गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में शामिल हुए और 1.87 लाख लोगों की जान चली गई। इसका अर्थ है कि प्रतिदिन औसतन 512 तथा हर घंटे लगभग 21 लोगों की मृत्यु हुई। उन्होंने यह भी बताया कि करीब एक लाख लोग जलने की चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें मृत्यु दर 30 प्रतिशत से अधिक रही।
इमीडिएट ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट एवं बर्न मैनेजमेंट पाठ्यक्रम में मरीजों की प्राथमिकता के आधार पर छंटाई (ट्रायेज), आपदा की स्थिति से निपटने की तैयारी, मस्तिष्क की दर्दनाक चोटों, मस्कुलोस्केलेटल ट्रॉमा तथा जलने से संबंधित चोटों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए। सैद्धांतिक सत्रों के साथ-साथ आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इसमें वायुमार्ग प्रबंधन, इंटरकॉस्टल ड्रेन डालना, इंट्राऑसियस एक्सेस स्थापित करना तथा रक्तस्राव को नियंत्रित करना जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं शामिल थीं।
विशेष व्याख्यानों, संवादात्मक शिक्षण और व्यावहारिक कौशल सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों की नैदानिक दक्षता और ट्रॉमा एवं बर्न से संबंधित आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारी को मजबूत करने का प्रयास किया गया। इस पहल का व्यापक उद्देश्य ऐसी चोटों से होने वाली रोकी जा सकने वाली बीमारियों, जटिलताओं और मृत्यु दर को कम करना है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से PGIMER के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (ट्रॉमा एंड बर्न्स) ने स्वास्थ्य पेशेवरों के क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण के जरिए देश में ट्रॉमा और बर्न देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाने के राष्ट्रीय प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
