चंडीगढ़:- पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के कंटीन्यूइंग नर्सिंग एजुकेशन (सीएनई) सेल ने 27 अक्टूबर 2026 को पीजीआईएमईआर के एपीसी ऑडिटोरियम में “स्लीप हेल्थ लिटरेसी: नॉलेज | अवेयरनेस | बेटर हेल्थ” विषय पर एक प्रभावशाली सेमिनार आयोजित किया। इस कार्यक्रम में लगभग 90 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी, नर्सिंग अधिकारी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एजुकेशन (एनआईएनई) के संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर और विभिन्न स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे। सभी का उद्देश्य नींद की स्वच्छ आदतों, शिफ्ट में काम करने से जुड़ी चुनौतियों और नींद संबंधी विकारों का इलाज न होने के दीर्घकालिक परिणामों के बारे में व्यापक जागरूकता बढ़ाना था।

सेमिनार की शुरुआत पीजीआईएमईआर के जॉइंट मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. नवनीत धालीवाल के परिचयात्मक संबोधन से हुई। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों की व्यक्तिगत भलाई और नैदानिक दक्षता सुनिश्चित करने में स्लीप हेल्थ लिटरेसी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

“ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया: खर्राटों से आगे—छिपे हुए परिणाम: अपने मरीजों, स्वयं और परिवार की सुरक्षा” विषय पर व्याख्यान देते हुए पीजीआईएमईआर के ओटोलैरिंगोलॉजी (ईएनटी) विभाग के प्रो. संदीप बंसल, जो इंडियन एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स फॉर स्लीप एपनिया (आईएएसएसएसए) के अध्यक्ष भी हैं, ने ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने खर्राटों के अलावा इसके प्रमुख संकेतों और लक्षणों पर प्रकाश डाला, शुरुआती जोखिम का आकलन करने के लिए सरल मूल्यांकन पैमानों की जानकारी दी और इसके अंतर्निहित शारीरिक कारणों को समझाया। प्रो. बंसल ने वजन प्रबंधन सहित निवारक उपायों का विवरण दिया तथा वयस्कों और बच्चों, दोनों के लिए उपयुक्त उपचार विकल्पों पर चर्चा की।

18 वर्षों के अनुभव वाली और पेरिस 2024 ओलंपिक खेलों में भारतीय ओलंपिक दल की पूर्व स्लीप सलाहकार डॉ. मोनिका शर्मा (एमफिल, पीएचडी) ने “स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए सर्केडियन मेडिसिन—नींद, सुरक्षा और शिफ्ट में काम” विषय पर एक रोचक सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने शिफ्ट में काम करने से होने वाली थकान कम करने और नींद की समग्र गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित जीवनशैली संबंधी बदलाव, संज्ञानात्मक तकनीकें और व्यावहारिक विश्राम रणनीतियां साझा कीं। उन्होंने नींद में बाधा डालने वाले सामान्य कारकों से बचने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की। इनमें कैफीन का सेवन, उसके सेवन का समय और नींद पर उसके शारीरिक प्रभाव; नीली रोशनी से होने वाले सर्केडियन व्यवधान को कम करने के लिए मोबाइल स्क्रीन की डिस्प्ले सेटिंग्स को अनुकूल बनाना; और रणनीतिक रूप से छोटी झपकी लेने की दिनचर्या अपनाना शामिल था।

सेमिनार का समापन औपचारिक सम्मान समारोह के साथ हुआ। इस दौरान अतिथि वक्ताओं और आयोजकों को पीजीआईएमईआर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख प्रो. अशोक कुमार, प्रो. पंकज अरोड़ा, अस्पताल प्रशासन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर विजय ताडिया और एडिशनल प्रोफेसर श्वेता ने सम्मानित किया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों को जलपान परोसा गया।