भवानीगढ़/संगरूर, 24 सितंबर:- पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना के निदेशक प्रसार शिक्षा के मार्गदर्शन में पीएयू-फार्म एडवाइजरी सर्विस सेंटर (एफएएससी), संगरूर द्वारा गांव तुरी (भवानीगढ़ के निकट) में खेत में फसल अवशेष प्रबंधन और उर्वरकों के संतुलित उपयोग संबंधी गांव स्तरीय किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। किसानों को संबोधित करते हुए मृदा विज्ञान के वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने धान की पराली जलाने को पूरी तरह छोड़ने और फसल अवशेषों के पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन के तरीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि खेत में फसल अवशेषों का प्रबंधन करने से मिट्टी के पोषक तत्वों और जैविक पदार्थ का संरक्षण होता है, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होता है, वायु प्रदूषण कम होता है और लंबे समय तक मिट्टी की उत्पादकता बनी रहती है।

डॉ. गर्ग ने फसल अवशेष जलाने से होने वाले पोषक तत्वों के भारी नुकसान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एक टन धान की पराली जलाने से लगभग 400 किलोग्राम जैविक कार्बन, 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश और 1.2 किलोग्राम सल्फर का नुकसान होता है। इसलिए पराली जलाने के बजाय किसानों को उचित यांत्रिक और कृषि संबंधी विधियों के माध्यम से खेत में ही फसल अवशेषों का प्रबंधन करना चाहिए, ताकि पोषक तत्वों का संरक्षण हो और मिट्टी के जैविक स्वास्थ्य में सुधार हो।

डॉ. गर्ग ने पराली प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों के बारे में बताया, जिनमें हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, पीएयू स्मार्ट सीडर और सरफेस सीडिंग-कम-मल्चिंग शामिल हैं। इन तकनीकों से फसल अवशेष जलाए बिना समय पर गेहूं की बुवाई की जा सकती है। उन्होंने किसानों को देर से बोई जाने वाली बासमती किस्मों में बालियां निकलने की अवस्था पर पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45) के 1.5 प्रतिशत पर्णीय छिड़काव द्वारा धान में बांझपन के प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने किसानों को धान और बासमती में कीटों तथा रोगों की निगरानी करने और उनके प्रबंधन के लिए पीएयू की सिफारिशों का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने उर्वरक डालने से पहले मिट्टी की जांच के महत्व पर जोर दिया, ताकि मिट्टी और फसल की वास्तविक पोषक तत्व आवश्यकताओं का पता लगाया जा सके। उन्होंने किसानों को उर्वरकों का विवेकपूर्ण उपयोग करने और टिकाऊ फसल उत्पादन के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।

किसानों को रबी फसलों में अनुशंसित जैव उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों के साथ-साथ पंजाब की परिस्थितियों के लिए उपयुक्त पीएयू द्वारा अनुशंसित गेहूं तथा अन्य रबी फसलों की किस्मों के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के साथ अनुशंसित किस्मों के गुणवत्तापूर्ण बीज का उपयोग अधिक उत्पादकता और बेहतर कृषि आय प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।

डॉ. गर्ग ने किसानों को अपने घरों में रसोई बगीचे स्थापित करने और उनका रखरखाव करने के लिए भी प्रोत्साहित किया, ताकि ताजी, पौष्टिक और सुरक्षित सब्जियों का उत्पादन किया जा सके तथा परिवार के पोषण और खाद्य सुरक्षा में योगदान दिया जा सके। उन्होंने किसानों को पीएयू किसान मेलों के बारे में भी जानकारी दी और इन आयोजनों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि उन्हें नवीनतम कृषि तकनीकों, अनुशंसित फसल किस्मों, कृषि मशीनरी, प्रकाशनों और पीएयू वैज्ञानिकों की विशेषज्ञ सलाह तक पहुंच मिल सके। शिविर का समापन सुरिंदर सिंह के धान के खेतों के दौरे के साथ हुआ, जहां किसानों के साथ फसल और अवशेष प्रबंधन की विधियों पर चर्चा की गई।