चंडीगढ़:- भारत में ब्रेन स्ट्रोक के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए पार्क हॉस्पिटल, मोहाली के विशेषज्ञों ने इस गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने, इसके लक्षणों की समय रहते पहचान करने और तत्काल चिकित्सा सहायता लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंगलवार को यहां आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर उपचार मिलने से स्ट्रोक के कारण होने वाली गंभीर दिव्यांगता और मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों की टीम में ग्रुप डायरेक्टर – इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डॉ. संदीप शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट – रेडियोलॉजी डॉ. गौरव धवन, कंसल्टेंट – न्यूरोलॉजी डॉ. संदीप कौर और कंसल्टेंट – न्यूरोसर्जरी डॉ. अनिल सोफत शामिल थे।

इस अवसर पर डॉ. संदीप शर्मा ने कहा, “ब्रेन स्ट्रोक दुनियाभर में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रहा है। भारत में हर साल स्ट्रोक के लगभग 1.5 से 2 मिलियन नए मामले सामने आने का अनुमान है। हालांकि, वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है, क्योंकि कई मरीज समय पर स्वास्थ्य सेवाओं तक नहीं पहुंच पाते। देश में प्रतिदिन हजारों लोग स्ट्रोक का शिकार होते हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल पाता है।”

डॉ. संदीप कौर ने कहा कि भारत में स्ट्रोक के बढ़ते मामलों के प्रमुख कारणों में इस बीमारी, इसके जोखिम कारकों और बचाव के उपायों के प्रति जागरूकता की कमी शामिल है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि लोगों को स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान और तत्काल चिकित्सा सहायता लेने के महत्व के बारे में जागरूक करना जरूरी है। इससे गंभीर दिव्यांगता और मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

स्ट्रोक की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. गौरव धवन ने कहा, “ब्रेन स्ट्रोक मृत्यु और दिव्यांगता का एक बड़ा कारण है तथा यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके गंभीर परिणामों के बावजूद, कई बार इस बीमारी को समय रहते पहचान नहीं मिल पाती। इसलिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना और समय पर उपचार सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है।”

स्ट्रोक के उपचार में आधुनिक तकनीकों की जानकारी देते हुए डॉ. अनिल सोफत ने बताया कि पार्क हॉस्पिटल, मोहाली में उपलब्ध मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी एक आधुनिक, न्यूनतम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया है। इसके माध्यम से इस्कीमिक स्ट्रोक के चुनिंदा मरीजों का उपचार लक्षण शुरू होने के 24 घंटे तक भी संभव हो सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि अचानक संतुलन बिगड़ना, दिखाई देने में परेशानी होना, चेहरे का एक ओर झुक जाना, एक बांह में कमजोरी आना या बोलने में लड़खड़ाहट होना स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर बिना देरी किए आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।


स्ट्रोक से बचाव के सुझाव:

रक्तचाप नियंत्रित रखें

स्वस्थ वजन बनाए रखें

नियमित व्यायाम करें

संतुलित आहार लें

शराब का सेवन सीमित करें

मधुमेह को नियंत्रित रखें

एट्रियल फिब्रिलेशन का उपचार कराएं

धूम्रपान छोड़ें

स्ट्रोक के लक्षणों के प्रति जागरूक रहें

चिकित्सकीय सलाह का पालन करें