माहिलपुर - मातृभाषा पंजाबी को कोई खतरा नहीं है, यह विचार पंजाब भवन सरी कनाडा के संस्थापक सुखी बाठ ने तीसवीं पुस्तक  "नवियां कलमां नवीं उड़ान" का विमोचन करते हुए कहे। उन्होंने आगे कहा कि जब हमारे पास नई पनीरी पंजाबी पढ़ने और पंजाबी में कविताएं, निबंध, कहानियां लिखन वाली मौजूद है. तो हमारी मातृभाषाको कोई खतरा नहीं है
 बच्चों को मातृभाषा प्रेमी बनाना माता-पिता एवं शिक्षकों का दायित्व है यदि वे इस उम्र में मातृभाषा अपना लेंगे तो अंत तक मातृभाषा का सम्मान करते रहेंगे। यह बच्चों में लिखने की भावना पैदा करने के लिए पंजाब भवन सरी की एक पहल है दुनिया के जिस कोने में पंजाबी रहते हैं, वहां के बच्चों की रचनायें, किताबें पंजाबी में प्रकाशित हो रहीं हैं।
इस अवसर पर प्रसिद्ध वकील एसएल विरदी, शिरोमणि साहित्यकार बलजिंदर मान, जिला शिक्षा अधिकारी गुरशरण सिंह, जिला लोक संपर्क अधिकारी ज्ञान सिंह, गीतकार राणा भोगपुरिया, उंकार सिंह तेजे और प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने अपने विचार रखे  कि यह छोटे बच्चे हमारी उम्मीद हैं| जिन्हें मातृभाषा पंजाबी को सुधारना, संवारना और ऊंचाइयों पर ले जाना है। उन्होंने विशेष रूप से जिला कपूरथला भाग दो की संपादकीय टीम, कमलेश संधू, प्रीत कौर प्रीति, मनदीप सिंह, हरजिंदर नियाना और सुखदेव सिंह सुख के प्रयासों की सराहना की।
पुस्तक के 34वें अंक के प्रकाशन के बाद छात्र लेखकों को मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं पुस्तकें देकर सम्मानित किया गया। उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। बलजिंदर मान ने सुखी बाठ को समर्पित पुस्तक 'ज्ञान के गहनें' प्रस्तुत की, फिर निक्की करुंबलन पत्रिका की प्रतियां वितरित की गईं, प्रोजेक्ट प्रभारी ओंकार सिंह तेजे ने "नवियां कलमां नवीं उड़ान" परियोजना के आगामी महीनों के कार्यक्रमों का विवरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने उन नन्हें बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि 28-30 वर्षों से बच्चों के लिए प्रकाशित होने वाली यह एकमात्र पत्रिका है जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है। मुख्य संपादक कमलेश कौर संधू ने सभी का धन्यवाद करते हुए अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मार्गदर्शक शिक्षकों ने विशेष सहयोग देकर इस मिशन में सफलता प्राप्त की है।