नवांशहर:- महिला एवं बाल विकास विभाग पंजाब द्वारा बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों की सुरक्षा और देखभाल के लिए 'मिशन वात्सल्य' योजना के तहत सरकारी चिल्ड्रेन होम चलाए जा रहे हैं, जहां विभिन्न प्रकार के बच्चों (जैसे कि लापता, बेसहारा, शोषण का शिकार, घर से भागे हुए या सड़क पर मिले बच्चे) को मुफ्त भोजन, आवास और शिक्षा दी जाती है।
माननीय उपायुक्त श्री गुरप्रीत सिंह औलख (आई.ए.एस.) ने बताया कि 19 वर्षीय एक मूक-बधिर युवक, जो करीब 15 साल की उम्र में नवांशहर जिले में लापता हालत में मिला था, को जिला बाल सुरक्षा यूनिट द्वारा बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार चिल्ड्रेन होम, होशियारपुर और बाद में लुधियाना जिले के 'हेवनली एंजल होम', दोराहा में रखा गया था। 
फिंगरप्रिंट और आधार कार्ड के जरिए पता चला कि बच्चा बिहार के पूर्णिया जिले का रहने वाला है। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री जगरूप सिंह के निर्देशों और जिला बाल सुरक्षा अधिकारी कंचन अरोड़ा के नेतृत्व में बच्चे के परिवार को ढूंढ निकाला गया और 19 साल की उम्र में उसे उसके परिवार के सुपुर्द किया गया।
जिला बाल सुरक्षा अधिकारी कंचन अरोड़ा ने बताया कि बच्चा अपने परिवार का इकलौता बेटा था और मूक-बधिर होने के कारण माता-पिता ने उसके मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी। हेवनली एंजल होम का प्रबंधन 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों को एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता देता है ताकि वे अपनी अगली जिंदगी में आत्मनिर्भर बन सकें। 
बच्चा 18 वर्ष की आयु के बाद अपने माता-पिता के सुपुर्द किया गया था, इसलिए माननीय उपायुक्त द्वारा बच्चे को दी गई एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता संबंधी बैंक पासबुक उसके माता-पिता को सौंपी गई। बच्चे की माता सुलेखा देवी ने उपायुक्त और जिला बाल सुरक्षा अधिकारी का धन्यवाद किया। उपायुक्त ने हेवनली चिल्ड्रेन होम, दोराहा, लुधियाना के प्रबंधन के इस प्रयास की सराहना भी की।