होशियारपुर:- सैंचुरियन ब्लक डोनर तथा पिछले चाली साल से भी अधिक समय से रक्तदान लहर से जुड़े डा. अजय बग्गा का कहना है कि अगर किसी देश, प्रदेश या इलाके की 1 प्रतिशत जनता भी रक्तदान को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना ले तो अस्पतालों में रक्त की कमी के कारण दाखिल मरीजों की बुझ रही जीवन की ज्योति को जगमगाए रखने में सहायता मिल सकती है।
आज यहां जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में इंडियन सोसायटी आफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन तथा अम्युनो हेमोटालजी की पंजाब चैप्टर के पैट्रन डा. अजय बग्गा ने कहा कि 18 साल से 65 साल तक के स्वस्थ व्यक्तियों, जिनका भार 45 किलोग्राम से अधिक तथा रक्त में हीमोगलोबिन की मात्रा 12.5 ग्राम से अधिक है, वो लोग हर तीन माह बाद रक्तदान की सेवा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विज्ञानिकों द्वारा की गई खोजों के आधार पर तथ्य सामने आए हैं कि रेगुलर रक्तदान की सेवा करने वाले व्यक्तियों को दिल की बीमारियों का खतर 88 प्रतिशत कम हो जाता है। कैंसर जैसी भयंकर बीमारियां, जैसे पेट, गले, फेफड़े तथा आंतड़ियों का कैंसर का जोखिम कम हो जाता है तथा रक्त की नई कोशिकाएं जल्दी बनती रहती हैं। रक्तदानियों में आयरन स्तर संतुलित रहता है। डा. बग्गा ने कहा कि रक्तदानियों का जिगर सेहतमंद रहता है तथा शरीर डिटोक्स हो जाता है, इम्युनिटी बढ़ती है।
डा. बग्गा ने कहा कि रक्तदान सेवा करने से मन को शांति मिलती है तथा रक्त की कमी के कारण जीवन मौत में संघर्ष कर रहे व्यक्तियों की जिंदगी बच जाती है। उन्होंने कहा कि रक्तदान सेवा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने से जहां बीमारियां कम होती हैं वहीं लोगों द्वारा दी जाने वाली दुआओं में भी भारी वृद्धि होती है। इसके अलावा रक्तदान भाईचारक सांझ तथा राष्ट्रीय एकता मजबूत करने में भी सबसे नेक प्रयास है।
रक्तदान सेवा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाए बीमारियां घटेंगी दुआएं बढ़ेंगी डा अजय बग्गा
