होशियारपुर:- गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने भारत की वर्तमान सामाजिक और न्यायिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए महाराज श्री ने कहा कि भारत के गौरवशाली सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्वरूप को नष्ट करने के लिए लॉर्ड मैकाले ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत तीन मुख्य प्रहार किए थे: क्लब, को-एजुकेशन (सह-शिक्षा) और कोर्ट।
​शंकराचार्य जी ने विस्तार से बताया कि कैसे इन तीन माध्यमों से भारतीय अस्मिता को चोट पहुँचाई गई। महाराज श्री के अनुसार, क्लब संस्कृति ने भारतीय परिवारों के संयम और मर्यादा को समाप्त कर दिया। इसने मद्यपान, अभक्ष्य भक्षण और अमर्यादित मनोरंजन को बढ़ावा देकर हमारी पारंपरिक जीवन पद्धति को दूषित किया है।
​ सह शिक्षा पद्धति पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि मैकाले का उद्देश्य ऐसी शिक्षा प्रणाली बनाना था, जो भारतीयों को अपनी परंपराओं से काटकर मानसिक रूप से गुलाम बनाए। सह-शिक्षा के माध्यम से ब्रह्मचर्य की शुचिता और ध्यान-केंद्रित अध्ययन के वातावरण को प्रभावित किया गया, जिससे समाज के नैतिक पतन की नींव रखी गई। 
वहीं शंकराचार्य जी ने वर्तमान न्यायिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन पंचायत और धर्म-आधारित न्याय व्यवस्था को हटाकर जटिल और खर्चीली 'कोर्ट' प्रणाली थोपी गई। यह व्यवस्था सत्य की खोज के बजाय साक्ष्यों और लंबी प्रक्रियाओं में उलझ कर रह गई है, जिससे आम आदमी को वास्तविक न्याय मिलना कठिन हो गया है।
​स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी ने बल देकर कहा कि यदि भारत को पुनः 'विश्वगुरु' के पद पर प्रतिष्ठित होना है, तो उसे मैकाले द्वारा थोपे गए इन मानसिक बंधनों से मुक्त होना होगा। उन्होंने आह्वान किया कि हमें अपनी शिक्षा में ऋषि-परंपरा को, अपने विवादों के निपटारे में सत्यनिष्ठ न्याय को और अपने आचरण में संयम को पुनः स्थापित करना ही होगा।
​ इस अवसर पर श्रद्धालु और गणमान्य लोगों में पूर्व सांसद और भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना, आदित्य वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुशील ठाकुर, संदीप नागौरी, भारत भूषण वर्मा, रमेश भारद्वाज, कमल वर्मा, तिलक राज चौहान, प्रधान राम पाल शर्मा, राहुल पासी, संध्या पासी, एडवोकेट प्रदीप जुल्का,अमिताभ शर्मा, राज नारायण शर्मा, सीमाशर्मा,  एडवोकेट नितिश भूषण वर्मा ,ज्वाला देवी जी से पण्डित गौरव शर्मा, एडवोकेट गौरभ गर्ग, उपस्थित रहे।